कलकत्ता पब्लिक स्कूल, ओरमांझी में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ संपन्न ।

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77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर स्थानीय ओरमांझी स्थित कलकत्ता पब्लिक स्कूल परिसर में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय समूह के उपाध्यक्ष श्री प्रभास कुमार झा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का विधिवत झंडोत्तोलन किया गया।


कार्यक्रम में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे। समारोह को उपाध्यक्ष श्री प्रभास कुमार झा, प्राचार्या श्रीमती प्रियंम्दा झा, निदेशक श्री मिथिलेश कुमार मिश्र तथा शैक्षणिक सलाहकार श्री त्रिभुवन प्रसाद झा ने संबोधित किया।

उपाध्यक्ष श्री प्रभास कुमार झा ने अपने संबोधन में भारतीय संविधान के निर्माण की आवश्यकता, गणतंत्र के महत्व तथा संविधान की मूल भावना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने 26 जनवरी 1950 को साकार हुई ‘हिंद स्वराज’ की परिकल्पना और गणतंत्र दिवस के अवसर पर विश्व के प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों के भारत आगमन की परंपरा का भी उल्लेख किया।

विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती प्रियंम्दा झा ने गणतंत्र दिवस को प्रजातंत्र की आत्मा बताते हुए कहा कि संविधान राष्ट्र के विकास की आधारशिला है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि “शिक्षा शेर के दूध की तरह होती है, जो इसे ग्रहण करता है, उसमें स्वतः आत्मविश्वास और साहस उत्पन्न हो जाता है।”

निदेशक श्री मिथिलेश कुमार मिश्र ने संविधान सभा के गठन, उसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा संविधान निर्मात्री समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान का निर्माण 9 दिसंबर 1946 से 26 नवंबर 1949 तक हुआ तथा इसकी शक्ति “हम भारत के लोग” से प्राप्त होती है। संविधान के तीनों स्तंभों के बीच शक्ति संतुलन को उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।


शैक्षणिक सलाहकार श्री त्रिभुवन प्रसाद झा ने संविधान विशेषज्ञ पालकीवाला के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि संविधान तभी सार्थक है जब उसकी मूल भावना के अनुरूप आचरण किया जाए।


कार्यक्रम के अंत में देशभक्ति की थीम पर छात्रों द्वारा आधा दर्जन से अधिक प्रेरणादायक नृत्य एवं गीत प्रस्तुत किए गए, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया।

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