झारखंड की आत्मा आज शोकाकुल है। दिशोम गुरु, हमारे पिता तुल्य पथप्रदर्शक, आदिवासी चेतना के प्रतीक आदरणीय शिबू सोरेन जी का निधन एक युग के अंत जैसा है। उन्होंने न केवल झामुमो की नींव रखी, बल्कि एक समतामूलक और स्वाभिमानी झारखंड की कल्पना को साकार किया।
आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो यह केवल एक नेता का जाना नहीं, बल्कि हमारे संघर्ष की जीवित आत्मा का पृथ्वी से विलीन हो जाना है। वे हमारे लिए संगठनकर्ता, विचार पुरुष, मार्गदर्शक और अपनेपन का दूसरा नाम थे।

उन्होंने हमें सिखाया कि राजनीति लोगों की सेवा का माध्यम है, और समाज के अंतिम व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा सबसे बड़ा धर्म है। उनकी सादगी, सिद्धांतवाद और संघर्ष की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
झामुमो परिवार उन्हें कभी भुला नहीं सकता। उनके अधूरे सपनों को पूरा करना ही अब हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से हम उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हैं।