दिशोम गुरु शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म की परंपरा,नेमरा में रीति-रिवाज को पूरा करते दिखीं कल्पना सोरेन।

Spread the love

सोशल मीडिया पर कुछ दिनों से कुछ तस्वीरें वायरल हो रही है यह सिर्फ तस्वीर ही नहीं है यह अपना सनातन संस्कृति का विशालता, महानता और महत्व को प्रदर्शित करता हुआ चित्र है।।



एक पुत्र के लिए पितृ ऋण का महत्व को दर्शाता है। यह उन लोगों के लिए सबक है जो थोड़ी सी व्यस्तता के कारण गांव में आकर अपने परंपराओं को निभाने से दूर भागते हैं ,और समया अभाव का करण बात कर शॉर्टकट में परंपराओं को निभाने की वकालत करते हैं।



यह चित्र उन लोगों के लिए भी सबक है जो शहरी चकाचौंध में अपने ग्राम, अपने ग्रामीण परंपराओं, और अपने ग्राम वासियों को भूल जाते हैं ।उन्हें छोटा समझते हैं पर एक वक्त आता है जब अपने ग्रामवासी भाई गोतिया आपके साथ खड़े रहते हैं।

निश्छल मन से बिना कोई दिखावा कि अपने संस्कृति को सीने से लगाकर अपने परंपराओं को प्रेम और आदरपूर्वक निभाते हुए, सच्चे सनातनी को सनातन धर्म की विशालता को प्रदर्शित करते हुए, इन चित्रों को मैं दिल से नमन करता यह हमारे समाज हमारे धर्म हमारे परंपरा हमारी सभ्यता हमारी संस्कृति के लिए प्रेरणा स्रोत है।



यह तस्वीर कहती है आओ चलें गांव की ओर, जहां जिंदगी का असली महत्व है ,जहां रिश्तों का संगम है, जहां परंपराओं का बट वृक्ष है ,जहां प्रेम का छांव है ,जहां अपनत्व है ,जहां लोग एक दूसरे के लिए उस समय खड़े होते हैं जब आप जिंदगी के सबसे कठिन परिस्थितियों से लड़ने के लिए अपने आप को असमर्थ महसूस करते हैं।



यह तस्वीर रहती हैं कि आप चाहे जिंदगी की कितने भी ऊंचाई पर क्यों नहीं पहुंच जाए आपको अपना परंपरा संस्कृति और धर्म ही मजबूती प्रदान करती है और जमीन से जोड़े हुए रखती है इन परंपराओं को अगर जिंदा रखना है तो गांव से जुड़े रहे।

Leave a Reply