गुमला में सरना समिति की आक्रोश महारैली — आदिवासी संस्कृति पर हमले के खिलाफ उठा बुलंद स्वर

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गुमला जिला सरना समिति के तत्वावधान में रविवार को गुमला टावर चौक से लेकर हड़ताली वृक्ष तक विशाल आक्रोश महारैली का आयोजन किया गया। इस रैली का नेतृत्व जिला अध्यक्ष हंदू भगत ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी वीर सपूतों के चित्र पर माल्यार्पण और सड़क हादसे में मारे गए आदिवासी युवक की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर की गई।

इस महारैली में रांची, रामगढ़, हजारीबाग, चैनपुर, लोहरदगा, गुमला समेत कई जिलों से हजारों लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की और महिला केंद्रीय अध्यक्ष निशा भगत थीं।

अपने संबोधन में श्री फूलचंद तिर्की ने कहा कि —

“आज सरना आदिवासियों की परंपरा और संस्कृति पर चौतरफा हमला हो रहा है। एक ओर कुर्मी-कुडमी समुदाय खुद को आदिवासी घोषित करवाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धर्मांतरित लोग अनुसूचित जनजाति का आरक्षण भोग रहे हैं।”



उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही केंद्रीय सरना समिति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मुलाकात कर डीलिस्टिंग की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपेगी।

महिला केंद्रीय अध्यक्ष निशा भगत ने कहा —

“कुर्मी-कुडमी कभी आदिवासी नहीं थे। आदिवासी बनने के लिए पैदा होना पड़ता है, बनाया नहीं जाता। वहीं धर्मांतरित ईसाई लोग दोहरा लाभ उठा रहे हैं — एक तरफ अनुसूचित जनजाति का और दूसरी तरफ अल्पसंख्यक का।”

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 241 और 342 का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जातियों में धर्म परिवर्तन करने पर आरक्षण समाप्त हो जाता है, लेकिन आदिवासी समाज में यह प्रावधान नहीं है, जिससे असमानता की स्थिति बनी हुई है।

जिला अध्यक्ष हंदू भगत ने कहा कि —

“ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासी संस्कृति को मटियामेट करने का प्रयास किया जा रहा है। रांची के डिबडीह सरना अखड़ा को तोड़ा गया, चांद गांव में चंगाई सभा के जरिए धर्मांतरण किया जा रहा है, और चैनपुर के तीन टांगर स्थित सरना स्थल पर कब्जे की कोशिश हो रही है।”



कार्यक्रम का संचालन संजय भगत ने किया।
इस अवसर पर केंद्रीय महासचिव संजय तिर्की, रांची जिला अध्यक्ष अमर तिर्की, प्रवक्ता एंजेल लकड़ा, उपाध्यक्ष विकास भगत, सचिव सपना गाड़ी, रामगढ़ जिला अध्यक्ष शिव उरांव, तथा कई जिलों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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