
नई दिल्ली, 20 नवम्बर 2025: 44वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF) 2025 में झारखंड पवेलियन इस वर्ष खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसकी प्रमुख वजह है—तसर सिल्क उत्पादन में झारखंड की राष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता, जहां देश के कुल तसर उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा अकेले झारखंड देता है।
यह उपलब्धि राज्य की प्राकृतिक संपदा, मेहनतकश कारीगरों और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का प्रमाण है। तसर आधारित आजीविका झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।

झारखंड बना देश की तसर राजधानी
झारखंड का तसर उद्योग आज तेजी से बढ़ते हुए एक मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है:
100 कोकून संरक्षण केंद्र
40 पूर्ण-सुविधायुक्त परियोजना केंद्र
2001 में 90 मीट्रिक टन उत्पादन
2024–25 में यह बढ़कर 1,363 मीट्रिक टन
यह तेज वृद्धि झारखंड को “देश की तसर राजधानी” के रूप में स्थापित करती है।
महिलाओं की भूमिका: झारखंड की तसर अर्थव्यवस्था की रीढ़
झारखंड के तसर उद्योग में 50–60% कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है।
विशेष रूप से यार्न उत्पादन पूरी तरह महिलाएँ ही संचालित करती हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ राज्य की तसर अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई हैं।

महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु—
झारक्राफ्ट,
JSLPS,
और रेशम निदेशालय
द्वारा प्रशिक्षण, रोजगार और बाज़ार से जोड़ने की व्यापक पहल चल रही है।
राज्य के CFC केंद्रों में 30–60 महिलाएँ एक साथ प्रशिक्षण, उत्पादन और कौशल विकास में सक्रिय रहती हैं।
पवेलियन का आकर्षण: कोकून से रेशम धागा निकालने की लाइव प्रक्रिया
IITF 2025 में झारखंड पवेलियन का मुख्य आकर्षण है तसर कोकून से रेशम धागा निकालने का लाइव डेमो।
महिला कारीगरों द्वारा कोकून उबालने से लेकर धागा तैयार करने तक की प्रक्रिया दर्शकों को मोहित कर रही है।
साथ ही, “तम्सुम” द्वारा वही धागा करघे पर बुनने की कला भी प्रदर्शित की जा रही है, जो झारखंड की पारंपरिक विरासत और महिलाओं के कौशल को उजागर करती है।
झारक्राफ्ट ने बढ़ाई पवेलियन की शोभा
झारक्राफ्ट के स्टॉल में प्रदर्शित—
तसर उत्पाद,
जूट कारीगरी,
और ग्रामीण हस्तशिल्प
देशभर के दर्शकों को झारखंड की समृद्ध कला एवं कारीगरी से रूबरू करा रहे हैं।

