
रांची : केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय कार्यालय, 13 आर आईआई टी बिल्डिंग, कचहरी परिसर रांची में आज डिलिस्टिंग मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की ने की।
बैठक में 12 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित डिलिस्टिंग महाधरना की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए झारखंड के विभिन्न जिलों में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
केंद्रीय अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की ने कहा कि —
“सरना आदिवासी, जो अपनी रूढ़िवादी परंपरा और संस्कृति में विश्वास रखते हैं, आज अपने हक और अधिकारों पर चौतरफा हमले का सामना कर रहे हैं। एक ओर कुर्मी-कुड़मी समाज आदिवासी आरक्षण पर दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धर्मांतरित ईसाई पहले से ही आदिवासियों का आरक्षण लाभ उठा रहे हैं।”
केंद्रीय महासचिव श्री संजय तिर्की ने कहा कि —
“ईसाई मिशनरियां दोहरा लाभ ले रही हैं। एक तरफ वे अल्पसंख्यक समुदाय के आरक्षण का लाभ उठा रही हैं, वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जनजाति का भी फायदा ले रही हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान मूल आदिवासियों को हो रहा है, जो आज भी गरीबी और उपेक्षा का शिकार हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि 12 दिसंबर 2025 का महाधरना ऐतिहासिक होगा, जिसमें झारखंड समेत कई राज्यों के सरना समाज के लोग बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे।
बैठक में केंद्रीय सरना समिति के वरीय उपाध्यक्ष प्रमोद एक्का, रांची जिला सरना समिति के उपाध्यक्ष नंदा उरांव, महासचिव संजय तिर्की, विनय उरांव, निरा टोप्पो, विमल कच्छप, राहुल क्रेकेटा, सोहन कच्छप सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
📌 मुख्य बिंदु:
12 दिसंबर को डिलिस्टिंग के समर्थन में ऐतिहासिक महाधरना।
राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय।
मूल आदिवासियों के हक की रक्षा को लेकर तीखी प्रतिक्रिया।