टंडवा की त्रासदी: प्रदूषण और लापरवाही के खिलाफ जनसुरक्षा की मांग ।

Spread the love

टंडवा प्रखंड — कभी ऊर्जा उत्पादन का केंद्र रहा यह इलाका आज प्रदूषण, दुर्घटनाओं और कंपनियों की लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है।
NTPC और CCL जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की कार्यप्रणाली अब लचर, गैर-जिम्मेदाराना और जनविरोधी होती जा रही है।

कोयला वाहनों का अनियंत्रित आवागमन न केवल गंभीर धूल और वायु प्रदूषण फैला रहा है, बल्कि आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाएँ आम लोगों की जान के लिए खतरा बन चुकी हैं।
धूल, धुआँ और कंपनियों की उदासीनता ने टंडवा को एक असहनीय वातावरण में धकेल दिया है — जहाँ लोगों का स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वाभिमान सब कुछ दांव पर लगा है।

इस बदहाल स्थिति के खिलाफ मैंने सदन में आवाज़ बुलंद की है और निम्न मांगें रखी हैं—

🔹 टंडवा क्षेत्र के लिए एक सशक्त और प्रभावी सड़क सुरक्षा नीति तुरंत लागू की जाए।
🔹 प्रदूषण मानकों का पालन न करने वाले वाहनों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
🔹 धूल और वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए वैक्यूम क्लीनर मशीनों की तत्काल व्यवस्था की जाए।

कंपनियों की ढीली कार्यशैली और प्रशासनिक लापरवाही ने जनता को बुरी तरह त्रस्त कर दिया है।
अब समय आ गया है कि इन कंपनियों को जवाबदेह बनाया जाए, क्योंकि टंडवा की जनता कोई प्रयोगशाला नहीं है —
उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वाभिमान सर्वोपरि हैं।

Leave a Reply