
रांची : कुड़मी जनजाति के संवैधानिक अधिकार की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। आज रांची के पुराना विधानसभा विधायक आवास क्लब, धुर्वा में टोटेमिक कुड़मी/कुरमी विकास मोर्चा की केंद्रीय एवं जिला कमेटी की एकदिवसीय बैठक केंद्रीय अध्यक्ष श्री शीतल ओहदार की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में अध्यक्ष ओहदार ने कहा कि “कुड़मी समाज वर्षों से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्षरत है। धरना, प्रदर्शन, रेल रोको आंदोलन और संसद घेराव के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक हमारी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई है।”
उन्होंने बताया कि कुड़मी समाज का प्रतिनिधि मंडल अब केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने जा रहा है, जहां वे दो प्रमुख मांगें रखेंगे —
1️⃣ कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल किया जाए।
2️⃣ कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिया जाए।

श्री ओहदार ने झारखंड सरकार से यह भी मांग की कि कुड़मी बाईसी प्रथा को सम्मिलित करते हुए पेसा कानून को पूरी शक्ति से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि “बाईसी प्रथा कुड़मी समाज की सांस्कृतिक धरोहर है, यदि इसका संरक्षण नहीं किया गया तो हमारी पहचान समाप्त हो जाएगी।”
बैठक में रांची, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो, चतरा, धनबाद, गिरीडीह, जामताड़ा, सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां समेत कई जिलों से केंद्रीय और जिला कमेटी के सदस्य उपस्थित थे।
बैठक में वक्ताओं — राजेंद्र महतो, रचिया महतो, सखीचंद महतो, थानेश्वर महतो, कपिल देव महतो, श्रीमती सोमा महतो और अन्य ने सामाजिक कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा और नशाखोरी के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी कुरीतियों को बढ़ावा देने वालों का समाज से बहिष्कार किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जो विद्यार्थी शिक्षा और खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, उन्हें समाज की ओर से सम्मानित किया जाएगा। साथ ही यह भी तय हुआ कि जो भी राजनीतिक दल कुड़मी समाज के संवैधानिक अधिकार की लड़ाई में साथ देगा, समाज का पूर्ण समर्थन उसे मिलेगा।
आगामी कुड़मी अधिकार महारैली को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी भी बैठक में की गई। इसके तहत हर गांव में पांच पुरुष और पांच महिलाओं को सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में केंद्रीय नेतृत्व से जोड़ा जाएगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल रहे, जिनमें दानिसिंह महतो, ललित मोहन महतो, सखीचंद महतो, सोना लाल महतो, सावित्री महतो, बेबी महतो, जितेंद्र महतो, रूपलाल महतो, बुद्धदेव महतो, मंगलदेव महतो, और सैकड़ों अन्य उपस्थित रहे।