
बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या को लेकर इंडस्ट्रियल पुलिस के एसपी मोहम्मद फरहाद हुसैन खान ने फैक्ट्री प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। एसपी ने कहा कि अगर पायनियर निटवेयर्स लिमिटेड फैक्ट्री ने समय रहते पुलिस को सूचना दी होती, तो दीपू की जान बचाई जा सकती थी।
स्थानीय मीडिया से बातचीत में एसपी ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी रात करीब 8 बजे मिली, जबकि फैक्ट्री में हिंसा शाम 5 बजे से ही शुरू हो चुकी थी। जब तक पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे। दीपू पर सोशल मीडिया के जरिए ईशनिंदा का आरोप लगाया गया, जबकि RAB-14 ने बाद में स्पष्ट किया कि दीपू के फेसबुक प्रोफाइल पर कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।

फैक्ट्री के एक सीनियर मैनेजर के मुताबिक, हालात सँभालने के लिए दीपू से जबरन एक फर्जी इस्तीफा भी लिखवाया गया, लेकिन उन्मादी भीड़ शांत नहीं हुई। आक्रोशित भीड़ ने फैक्ट्री का गेट तोड़ दिया और सिक्योरिटी रूम में छिपे दीपू को बाहर घसीटकर पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद उसके शव को आग के हवाले कर दिया गया।
एसपी फरहाद हुसैन खान ने बताया कि उनका दफ्तर घटना स्थल से 15 किलोमीटर दूर था, जबकि भालुका थाना पास में ही था, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से समय पर कोई कॉल नहीं किया गया। एसपी ने कहा, “फैक्ट्री प्रबंधन का एक समय पर किया गया कॉल दीपू की जान बचा सकता था।” वहीं फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने दीपू को भीड़ के हवाले नहीं किया बल्कि वे खुद स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे थे।