प्रोटोकॉल से ऊपर इंसानियत: सरायकेला में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनता से मिलकर जीता दिल ।

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सरायकेला : सरायकेला से सामने आई ये तस्वीरें केवल एक राष्ट्रपति के दौरे की नहीं, बल्कि आम जनता से सीधे जुड़ाव की एक जीवंत मिसाल हैं। द्रौपदी मुर्मू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संवैधानिक पद की गरिमा के साथ-साथ मानवीय संवेदनाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

एनआईटी जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह से लौटते समय, जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला आदित्यपुर आकाशवाणी चौक के पास पहुंचा, अचानक वह रुक गया। तय प्रोटोकॉल से हटकर राष्ट्रपति स्वयं वाहन से उतरीं और पैदल चलते हुए सड़क किनारे खड़े आम नागरिकों की ओर बढ़ गईं।

अचानक सामने राष्ट्रपति को देखकर लोग पहले चौंक गए, लेकिन अगले ही पल उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करीब आधा किलोमीटर तक आम जनता के बीच रहीं। उन्होंने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, बच्चों से स्नेहपूर्वक बातचीत की और उन्हें टॉफियां भी दीं। उनका यह सरल, आत्मीय और अपनापन भरा व्यवहार माहौल को पूरी तरह भावुक कर गया।

राष्ट्रपति को इतने करीब पाकर लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। चारों ओर भारत माता की जय, वंदे मातरम् और जय झारखंड के नारों से वातावरण गूंज उठा। तालियों की गड़गड़ाहट और हाथ हिलाते लोग इस पल को हमेशा के लिए यादगार बना गए।

हालांकि यह जनसंवाद निर्धारित प्रोटोकॉल से अलग था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। सुरक्षा बलों ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को पूरी कुशलता से नियंत्रित किया। पूरे घटनाक्रम के दौरान माहौल शांत, सकारात्मक और अनुशासित बना रहा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लगातार मुस्कुराते हुए जनता का अभिवादन स्वीकार करती रहीं। कहीं कोई अफरा-तफरी नहीं दिखी, सिर्फ सम्मान, गर्व और अपनापन नजर आया।

यह दृश्य केवल एक औपचारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, बल्कि राष्ट्रपति और आम जनता के बीच सीधे संवाद और विश्वास की एक सशक्त तस्वीर थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रपति का यह मानवीय रूप वे जीवन भर नहीं भूलेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह कदम एक बार फिर यह साबित करता है कि वे जमीन से जुड़ी हुई नेता हैं, जो प्रोटोकॉल से ज्यादा इंसानियत, सादगी और अपनापन को प्राथमिकता देती हैं।

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