
रांची : नगर निकाय चुनाव को लेकर जारी नए आरक्षण रोस्टर ने रांची नगर निगम के कई वार्डों में सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। आरक्षण रोस्टर का सबसे ज्यादा असर वार्ड संख्या 26, 27 और 34 में देखने को मिल रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि वार्ड 34 से एक साथ तीन निवर्तमान पार्षद चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, वार्ड 34 इस बार सामान्य श्रेणी में रखा गया है, जबकि वार्ड 26 और वार्ड 27 आरक्षण के दायरे में चले गए हैं। वार्ड 27 इस बार आदिवासी महिला के लिए आरक्षित किया गया है, वहीं वार्ड 26 पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। ऐसे में इन दोनों वार्डों के निवर्तमान पार्षदों को अपना वार्ड छोड़कर दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की मजबूरी पैदा हो गई है।
बताया जा रहा है कि वार्ड 27 के निवर्तमान पार्षद ओमप्रकाश को इस बार अपना वार्ड छोड़ना पड़ रहा है और वे अब वार्ड 34 से किस्मत आजमाएंगे। वहीं, वार्ड 26 के निवर्तमान पार्षद अरुण कुमार झा भी आरक्षण के कारण वार्ड 34 से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। इसके अलावा वार्ड 34 के मौजूदा निवर्तमान पार्षद पहले से ही चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं।
आरक्षण रोस्टर के कारण पहली बार ऐसा हो रहा है कि नगर निगम चुनाव में एक ही वार्ड से तीन-तीन निवर्तमान पार्षद आमने-सामने होंगे। इससे वार्ड 34 का चुनाव बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
उधर, वार्ड चार और वार्ड 18 से भी चुनावी समीकरण बदले हैं। पूर्व उपमहापौर संजीव विजयवर्गीय इस बार वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ेंगे। आरक्षण रोस्टर के कारण उन्हें भी अपना पुराना वार्ड छोड़ना पड़ा है। इस बार वार्ड 10 सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, जबकि वार्ड चार और वार्ड 18 से वे चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। वार्ड चार से उनके सामने पूर्व पार्षद हुस्नआरा और वार्ड 18 से संभावित उम्मीदवार के रूप में महुआ मांझी के पुत्र का नाम सामने आ रहा है।
राज्य में नगर निकाय चुनाव पहली बार ट्रिपल टेस्ट के साथ कराए जा रहे हैं। इसी के तहत जिला प्रशासन ने नए सिरे से सभी वार्डों का आरक्षण रोस्टर तैयार किया है। रोस्टर लागू होने के बाद कई वार्डों में जहां महिलाएं आरक्षित हो गई हैं, वहीं कई सामान्य वार्ड आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। इसका सीधा असर निवर्तमान पार्षदों पर पड़ा है, जिन्हें मजबूरी में अपना वार्ड छोड़कर दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ना पड़ रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरक्षण रोस्टर ने इस बार नगर निगम चुनाव को बेहद रोचक बना दिया है। खासकर वार्ड 34 में तीन निवर्तमान पार्षदों की टक्कर चुनावी परिणाम को पूरी तरह अप्रत्याशित बना सकती है