
विधानसभा में प्री-बजट चर्चा के दौरान उस समय माहौल अचानक गरमा गया जब राज्य के वित्त मंत्री ने खुद को गणित में कमजोर बता दिया।
मंत्री ने सदन में मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने क्लास 6 के बाद ही गणित छोड़ दिया था, जबकि आज पूरे राज्य के वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। यह बयान सुनते ही सत्ता पक्ष में हल्की हँसी गूंजी, लेकिन विपक्ष को जैसे बैठे-बैठे बड़ा मुद्दा मिल गया।
विपक्षी नेताओं ने तुरंत चुटकी लेते हुए सवाल खड़ा किया कि जब मंत्री को गणित ही नहीं आता, तो अरबों-करोड़ों के बजट का हिसाब-किताब कैसे संभाला जा रहा है? विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि “जिसे जोड़-घटाना नहीं आता, वह राज्य की अर्थव्यवस्था का संतुलन कैसे बनाएगा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्री का यह बयान ईमानदारी और सादगी का भाव दर्शाता है, लेकिन राजनीति में ऐसे बयान अक्सर विरोधियों के लिए हथियार बन जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी यह टिप्पणी तेजी से वायरल हो रही है और मीम्स की बाढ़ आ गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह बयान आने वाले बजट सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच कितनी सियासी गर्मी पैदा करता है।