मनरेगा संरक्षण को लेकर रांची में कांग्रेस और सिविल सोसायटी की अहम बैठक, ‘काम मांगो अभियान’ को मिलेगा नया विस्तार

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रांची | मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के संरक्षण और इसके अधिकार-आधारित स्वरूप को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से रांची में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सामाजिक संगठनों ने मनरेगा के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान को रेखांकित करते हुए इसे बचाने के लिए कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अभियान का समर्थन किया और साझा कार्ययोजना पर सहमति व्यक्त की।

बैठक में झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी भूपेंद्र मरावी, रचनात्मक कांग्रेस के नेशनल चेयरमैन एवं मनरेगा कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य संदीप दीक्षित, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप, प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. ज्यां द्रेज, झारखंड नरेगा मंच के जेम्स हेरेंज, मनरेगा वॉच के बलराम सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में मनरेगा के माध्यम से झारखंड में परिसंपत्ति निर्माण, सतत आजीविका और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। सामाजिक संगठनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मनरेगा ने गांवों में रोजगार और मजदूरी सुनिश्चित करने के साथ श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है।

संगठनों ने मांग की कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना जॉब कार्ड हटाने की प्रक्रिया रोकी जाए, काम मांगने पर काम की गारंटी सुनिश्चित की जाए, मजदूरी का समय पर भुगतान हो, पंचायत स्तर पर मस्टर रोल जारी किए जाएं और सोशल ऑडिट प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए।

बैठक में VB GRAM G को लेकर भी चिंता जताई गई। सामाजिक संगठनों और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इससे मनरेगा के अधिकार-आधारित स्वरूप पर असर पड़ सकता है। इस मुद्दे पर सभी ने मिलकर रणनीतिक समन्वय के साथ मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बनाए रखने और अभियान को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने घोषणा की कि ‘काम मांगो अभियान’ के तहत प्रत्येक विधायक अपने क्षेत्र में मॉडल अभियान चलाएगा। इसके अलावा राज्य स्तर पर मनरेगा टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा और प्रत्येक जिले में कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए जाएंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम, ब्लॉक स्तर पर संवाद और सोशल ऑडिट प्रणाली को सक्रिय करने का भी निर्णय लिया गया।

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि 2 से 5 फरवरी 2026 के बीच आयोजित ‘काम मांगो अभियान’ में 4,080 पंचायतों के 1,74,245 लोगों ने भाग लिया, जिनमें से 1,03,158 लोगों ने काम की मांग दर्ज कराई। इस दौरान 17,914 नए जॉब कार्ड बनाए गए और 39,593 नई योजनाओं के आवेदन प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत अब तक 1017.65 लाख मानव-दिवस सृजित हुए हैं, जिसमें 52 प्रतिशत जॉब कार्ड महिलाओं के नाम हैं।

बैठक के अंत में सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे मनरेगा को बचाने और ग्रामीण गरीबों के रोजगार अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस और सरकार के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

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