कुर्मी समाज की ST मांग का विरोध, केंद्रीय सरना समिति अध्यक्ष फूलचंद तिर्की का बयान

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रांची, 1 मार्च 2026: केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए कुर्मी समाज द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि कुर्मी समाज द्वारा रेल टेका, डहर छेका और रैलियों के माध्यम से अनुसूचित जनजाति का दर्जा मांगना अनुचित है।


उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सरल और सीधा है, लेकिन कुर्मी समाज अक्सर आदिवासी समाज के अधिकारों और लाभों को प्राप्त करने का प्रयास करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुर्मी समाज और आदिवासी समाज की परंपराओं, पूजा-पाठ और सामाजिक रीति-रिवाजों में काफी अंतर है।


फूलचंद तिर्की ने कहा कि कुर्मी समाज में जन्म से लेकर मृत्यु तक विवाह और अन्य संस्कार पंडितों द्वारा कराए जाते हैं, जबकि आदिवासी समाज में ये परंपराएं पहान, पुजार, मांझी, हड़ाम, ढोकलो, सोहर और नायके जैसे पारंपरिक धार्मिक पदाधिकारियों द्वारा संपन्न होती हैं।


उन्होंने कहा कि कुर्मी समाज मूर्ति पूजा करता है, जबकि आदिवासी समाज प्रकृति पूजा पर आधारित है। इसके साथ ही कुर्मी समाज में तिलक-दहेज जैसी प्रथाएं प्रचलित हैं, जबकि आदिवासी समाज में ऐसी प्रथाएं नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कुर्मी समाज में हिंदू विवाह अधिनियम लागू होता है, जबकि आदिवासी समाज अपने प्रथागत कानूनों के आधार पर सामाजिक व्यवस्था संचालित करता है।


फूलचंद तिर्की ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कुर्मी समाज अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग जारी रखता है तो आदिवासी समाज इसका विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में जिस तरह इस मांग का विरोध किया गया था, उसी तरह आगे भी जोरदार विरोध किया जाएगा।

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