आदिवासियों की धार्मिक पहचान पर केंद्रीय सरना समिति की बड़ी बैठक, जनगणना में सरना कोड की मांग तेज

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रांची। केंद्रीय सरना समिति की ओर से गुरुवार को रांची स्थित कचहरी परिसर के 13 आरआईटी बिल्डिंग स्थित केंद्रीय कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने की।


बैठक में आदिवासियों की विशेष धार्मिक पहचान, सरना कोड, वर्ष 2026-27 की जनगणना में अलग धर्म कॉलम तथा धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।


बैठक को संबोधित करते हुए फूलचंद तिर्की ने कहा कि भारत सरकार द्वारा जनगणना प्रपत्र में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध धर्म के लिए अलग कॉलम दिया जाता है, लेकिन प्राकृतिक पूजक आदिवासियों के लिए कोई अलग कॉलम नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में आदिवासी समाज को मजबूरन दूसरे धर्मों के कॉलम में अपनी पहचान दर्ज करनी पड़ती है, जबकि आदिवासी समाज वर्षों से अपनी धार्मिक पहचान ‘सरना कोड’ की मांग करता आ रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार बिना अलग धर्म कॉलम के जनगणना कराती है तो आदिवासी समाज इसका विरोध करेगा।


बैठक में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष सत्यनारायण लकड़ा, बाना मुंडा, जगदीश उरांव, तुलसी उरांव, विमल कच्छप, दीपक जायसवाल सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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