
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में शनिवार को हॉकी खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और आदिवासी-मूलवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हॉकी प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ियों के सम्मान की मांग को लेकर शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला। यह मार्च जयपाल सिंह स्टेडियम से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा, जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, प्रशिक्षक, खेल प्रेमी और सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पूर्व भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान असुंता लकड़ा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आए और खिलाड़ियों का खेल व्यवस्था पर भरोसा कायम रहे। उन्होंने मांग की कि हॉकी झारखंड की सदस्यता, चुनाव प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यों में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा खिलाड़ियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

मार्च में शामिल पूर्व खिलाड़ियों ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी, विशेषकर महिला खिलाड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उन्हें सुरक्षित एवं निष्पक्ष माहौल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि हॉकी में सुशासन, पारदर्शिता और खिलाड़ियों के सम्मान की रक्षा के लिए है।
सामाजिक कार्यकर्ता निरंजना हेरेंज टोप्पो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली आदिवासी बेटी असुंता लकड़ा का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को सम्मान और न्याय मिलना चाहिए।
वहीं अजय टोप्पो ने हॉकी प्रशासन में तत्काल बदलाव की मांग करते हुए भोला सिंह को पद से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि हॉकी के संचालन में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

विरोध मार्च में बाहा लिंडा, राहुल तिर्की, आकाश तिर्की, प्रेम शाही मुंडा, पीसी मुर्मू, राकेश बड़ाईक, बृज किशोर बेदिया, संगीता कच्छप, क्रिस्टो कुजूर सहित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई हॉकी खिलाड़ी शामिल हुए। इनमें मनोहर टोपनो, कमल सोरों, जोसफ लुगुन, मनोहर कुल्लू, जयंत केरकेट्टा, वीरेंद्र लकड़ा, पुष्पा लकड़ा, कांति लकड़ा, विनय मुंडा, तिलोसफर एक्का, सुमराई टेटे और शशि टोपनो प्रमुख रहे।
मार्च शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से खिलाड़ियों के अधिकारों और खेल में पारदर्शिता की मांग को आगे भी जारी रखने का संकल्प दोहराया।