
रांची: राजधानी रांची के सरना भवन, नगड़ाटोली में मंगलवार को प्रस्तावित ‘उलगुलान पदयात्रा’ को सफल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, ग्राम सभा प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और ग्रामीणों ने भाग लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि उलगुलान पदयात्रा 5 अगस्त 2026 को भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू (खूंटी) से शुरू होकर 8 अगस्त 2026 को कोकर स्थित भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल पर समाप्त होगी।
आयोजन समिति के अनुसार, यह पदयात्रा जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता, संवैधानिक अधिकारों, पांचवीं अनुसूची, PESA Act तथा CNT/SPT Act के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर आयोजित की जा रही है। साथ ही आदिवासी भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा का संदेश भी दिया जाएगा।

बैठक के दौरान रांची के नगड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित RIMS-2 परियोजना को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। उपस्थित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य से जुड़ी उनकी आपत्तियों का समुचित समाधान नहीं किया गया तथा प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में कथित अवैध बंदोबस्ती, अवैध जमाबंदी, सादा पट्टा और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आदिवासी भूमि हस्तांतरण के मामलों की राज्यव्यापी जांच की मांग उठाई गई।
आयोजन समिति ने मांग की कि RIMS-2 परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही सभी विवादों का न्यायसंगत और विधिसम्मत समाधान होने तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।

बैठक में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की गई। इसके अलावा सरकार से प्रभावित ग्रामीणों के साथ तत्काल वार्ता कर उनकी समस्याओं का न्यायपूर्ण और विधिसम्मत समाधान सुनिश्चित करने की अपील की गई।
बैठक में झारखंड के सभी ग्राम सभाओं, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उलगुलान पदयात्रा में शामिल होकर इसे सफल बनाने तथा जल, जंगल, जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के इस जनआंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
नोट: RIMS-2 परियोजना, भूमि अधिग्रहण और अन्य विषयों को लेकर लगाए गए आरोप एवं मांगें आयोजन समिति और बैठक में शामिल लोगों द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में किए गए दावे हैं। संबंधित सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर समाचार को अपडेट किया जा सकता है।