जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा झारखण्ड के नेतृत्व में आरोग्य भवन सभागार में एक बैठक की गई जिसमें आगामी 9 फरवरी 2024 को झारखण्ड के एक दिवसीय राज भवन के पास धरना सह ज्ञापन माननीय मुख्यमंत्री एवं महामहिम राज्यपाल महोदय झारखण्ड के नाम से निर्धारित है जिसमें जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा निम्नलिखित मांग की जाती है –
(1) जिस प्रकार विषेष सत्र बुलाकर विधानसभा से सरना धर्म कोड विधानसभा से पारित किया गया है उसी प्रकार विधानसभा से जनजाति सुरक्षा मंच मांग करता है कि विषेष सत्र बुलाकर डीलिस्टिंग बिल भी सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र सरकार को भेजें ।डीलिस्टिंग यानि जो जनजाति अपनी धर्म-संस्कृति, परम्परा, रूढ़ी प्रथा छोड़कर इसाई या मुस्लिम धर्म अपना लिए हैं वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करना है या डीलिस्टिंग करना है अर्थात् वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ न मिले यही डीलिस्टिंग है।

(2)इसलिए जनजाति सुरक्षा मंच आप सभी से आवाह्न करता है कि आप स्व. कार्तिक उराँव जी की जन्म शताब्दी वर्ष के अन्दर पुनः अपने स्वःधर्म में वापस आयें (रूढि प्रथा) अन्यथा आप लोगों का डीलिस्ट होना तय है।
(3)अभी वर्तमान समय में ईसाई धर्मावलम्बी सभी केन्द्र सरकार एवं झारखण्ड सरकार का आरक्षण रोस्टर पिछड़ी जाति में सूचीबद्ध है और वे जनजाति का आरक्षण का लाभ ले रहे रहैं, इस पर सरकार अविलम्ब रोक लगाये। यही कारण है कि इतना-इतना आरक्षण होने के बावजुद भी आदिवासी गरीब एवं मजदूरी तथा दाई काम करने के लिए मजबूर हैं?
वर्तमान समय में जो जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो रहा है, उस जाति प्रमाण पत्र में पिता के नाम के साथ-साथ पति का नाम होना अनिवार्य हो ताकि जनजाति का आरक्षण का लाभ अन्य नहीं ले सकें।
इस बैठक में जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव, मेघा उराँव , राजू उराँव , संदीप उराँव, हिन्दुवा उराँव , सन्नी उराँव , पिंकी खोया , अंजली लकड़ा , दुर्गा उराँव , मनोज भगत ,अशोक मुंडा, अजय भोक्ता, देवकी मुंडा, आरती कुजूर , व अन्य उपस्थित थे।
