
रोम स्थित संत पेत्रुस कॉलेज में अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय “आभास” द्वारा नए आदिवासी भाई-बहनों के स्वागत हेतु एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। पूरे कार्यक्रम में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला।
समारोह की शुरुआत ‘आभास’ के अध्यक्ष फादर विजय टोप्पो ने 100 से अधिक प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत कर की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि इस तरह के मिलन समारोह न केवल आपसी भाईचारे को मजबूत करते हैं, बल्कि हमें अपनी जड़ों और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जोड़े रखते हैं।
इसके बाद पवित्र मिस्सा बलिदान का अनुष्ठान हजारीबाग के बिशप, अति माननीय धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो द्वारा संपन्न किया गया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा—
“हम सभी ख्रीस्तीय येसु मसीह की शिक्षा के प्रचारक बनने के लिए बुलाए गए हैं। इस जुबली वर्ष में हमें हर पीड़ित और निराश व्यक्ति के लिए आशा का दीप बनना है।”
उन्होंने रोम में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

समारोह का मुख्य आकर्षण पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की गूंज और आदिवासी नृत्य रहा, जिसके साथ नए विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर कांसे के लोटा और थरिया जैसे पारंपरिक प्रतीकों का भी प्रयोग किया गया।
इसके बाद सिस्टर ऐलिस और फादर आलोक के नेतृत्व में परिचय सत्र आयोजित हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने एक-दूसरे को और करीब से जाना।
कार्यक्रम का समापन पारंपरिक आदिवासी व्यंजनों के साथ आयोजित प्रीति भोज और समूह नृत्य से हुआ। सभी ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया। अंत में अध्यक्ष फादर विजय टोप्पो ने सभी आगंतुकों, आयोजकों और सहभागियों का आभार जताया।
‘आभास’ यानी अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय, रोम में भारतीय आदिवासी छात्रों और धर्मसेवियों का एक प्रमुख आध्यात्मिक-सांस्कृतिक मंच है। इसका उद्देश्य प्रवासी आदिवासी भाई-बहनों को उनकी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से जोड़कर रखना है।

