पेसा कानून को झारखंड कैबिनेट से मंजूरी: केंद्रीय सरना समिति ने बताया आदिवासी स्वाभिमान का ऐतिहासिक क्षण ।

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रांची | पेसा कानून को झारखंड कैबिनेट से मंजूरी मिलने के उपलक्ष्य में आज केंद्रीय सरना 13 आरआईटी बिल्डिंग, कचहरी परिसर, रांची के तत्वावधान में केंद्रीय धमकुडिया करमटोली, रांची में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।


इस अवसर पर केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने इसे आदिवासी समाज के लिए गौरव का क्षण बताया।

उन्होंने कहा कि रूढ़िवादी परंपरा और संस्कृति को मानने वाले आदिवासी समाज ने सदियों से पेसा कानून के लिए संघर्ष किया है और आज वह सपना साकार हुआ है।


केंद्रीय सरना समिति की केंद्रीय महिला अध्यक्ष निशा भगत ने कहा कि पेसा कानून लागू कराने के लिए गुमला से रांची राजभवन तक पदयात्रा की गई थी और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि पेसा कानून लागू होते देख आदिवासी समाज में खुशी का माहौल है और इसके लिए उन्होंने झारखंडवासियों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने 1996 की भूरिया कमेटी द्वारा प्रस्तावित पेसा नियमावली को हू-ब-हू लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि पेसा कानून में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

केंद्रीय सरना समिति के प्रवक्ता एंजेल लकड़ा ने कहा कि पेसा कानून लागू होने से गांवों में पत्थर, बालू, सोना, चांदी, तांबा और अबरक जैसे प्राकृतिक संसाधनों के नियंत्रण और प्रबंधन का अधिकार ग्राम सभा को मिलेगा। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों में भी ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होगी।

प्रेस वार्ता में गुमला जिला सरना समिति के अध्यक्ष हंदू भगत, रांची जिला सरना समिति के अध्यक्ष अमर तिर्की, एंजेल लकड़ा, प्रमोद एक्का, विनय उरांव, पंचम तिर्की, सागर टोप्पो, पिंटू लिंडा, रतन उरांव, लक्ष्मी मुंडा, राजन भेंगरा सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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