
झारखंड सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया गया था।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में हुई। कोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जेपीएससी से जवाब मांगा है।
दो याचिकाओं में दीपमाला एवं अन्य तथा सोनम कुमारी ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के विज्ञापन संख्या 1/2024 को रद्द करने संबंधी सरकार के आदेश को चुनौती दी है। वहीं, तीसरी याचिका में सौरव सिंह एवं अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी है।

याचिकाकर्ता सोनम कुमारी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने दूसरी नौकरी छोड़कर इस पद पर योगदान दिया था। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने ट्रेनिंग भी पूरी की। इसके बाद 18 अगस्त को सरकार की ओर से नियुक्ति रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी गई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता पीएएस पति ने पक्ष रखा।
दरअसल, CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने उन परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आई थी। साथ ही वर्ष 2014 से हुई नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी बात कही गई थी।
इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी। इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया था।
अब हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद संबंधित नियुक्त कर्मियों और अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार और जेपीएससी के जवाब के बाद कोर्ट आगे का निर्णय लेगा।