हनुमान मंदिर विवाद पर रिम्स का बड़ा फैसला, साइलेंट ज़ोन घोषित होगा परिसर ।

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में हनुमान मंदिर को लेकर उठे विवाद के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। रिम्स निदेशक की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की गई और कई अहम निर्णय लिए गए।


बैठक में डीन, चिकित्सा अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और सभी विभागाध्यक्ष शामिल हुए। चर्चा का मुख्य केंद्र पुराने आकस्मिक वार्ड के पास स्थित हनुमान मंदिर और वहां लाउडस्पीकर के उपयोग से उत्पन्न स्थिति रही।


निदेशक ने जानकारी दी कि मंदिर में पिछले करीब दो वर्षों से लाउडस्पीकर का उपयोग किया जा रहा था। इसे बंद करने के लिए कई बार मौखिक निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद इसका उपयोग जारी रहा। मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए निदेशक स्वयं मौके पर पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में पुजारी को निर्देश देते हुए लाउडस्पीकर जब्त कर लिया गया। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई।


इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया गया। रिम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मंदिर में पहले विधिवत पूजा-अर्चना की गई और उसके बाद ही कार्रवाई की गई।


ट्रॉमा सेंटर प्रभारी ने बताया कि मंदिर ट्रॉमा सेंटर के काफी नजदीक स्थित है, जहां गंभीर मरीजों का इलाज होता है। ऐसे में शोर से मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी को देखते हुए अस्पताल परिसर को साइलेंट ज़ोन घोषित करने पर सहमति बनी है।


बैठक में यह भी सामने आया कि मंदिर का पूर्व स्वरूप छोटा था, लेकिन पिछले वर्ष रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण कर इसका विस्तार किया गया। हालांकि प्रशासन ने साफ किया कि धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाएगा, लेकिन अस्पताल में मरीजों की सुविधा सर्वोपरि है।


बैठक में लिए गए प्रमुख फैसलों के तहत अब मंदिर का प्रबंधन रिम्स प्रशासन के अधीन होगा और पुजारी की नियुक्ति भी प्रशासन द्वारा की जाएगी। साथ ही मंदिर के संचालन के लिए सर्वधर्म प्रबंधन समिति गठित की जाएगी। अस्पताल परिसर में असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए भी सख्त कदम उठाने की बात कही गई है।


इसके अलावा अस्पताल परिसर में वाहनों, ठेलों और दुकानों से होने वाले शोर पर नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज की संख्या बढ़ाने और रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।


रिम्स प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर इलाज उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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