पेसा नियमावली पर केंद्रीय सरना समिति की बैठक, आदिवासी अधिकारों से खिलवाड़ का आरोप ।

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रांची : आज दिनांक 04 जनवरी 2026 को केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय कार्यालय 13 आरआईटी बिल्डिंग, कचहरी परिषद, रांची में पेसा नियमावली को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने की।


बैठक के दौरान पेसा कानून एवं पेसा नियमावली को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार पेसा नियमावली के माध्यम से आदिवासियों को छलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जीपीआर एक्ट 2001 को पेसा नियमावली के साथ जोड़ दिया है, जो पूरी तरह अनुचित है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा नियमावली मूल रूप से वर्ष 1996 में भूरिया समिति द्वारा बनाई गई थी, जो पूरी तरह से आदिवासी समाज की रूढ़िवादी परंपरा, संस्कृति और ग्राम सभा की सर्वसम्मति पर आधारित थी। जबकि पंचायत विस्तार अधिनियम 2001 के तहत मुखिया, सरपंच और जिला परिषद जैसे पदों का चयन निर्वाचन प्रक्रिया से होता है, जो पारंपरिक आदिवासी व्यवस्था के विपरीत है।


श्री तिर्की ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में पेसा कानून को सिर्फ राजनीतिक उद्देश्य से लागू किया गया है, जिससे आदिवासी स्वशासन की मूल भावना कमजोर हो रही है।


बैठक में केंद्रीय सरना समिति के संरक्षक भुवनेश्वर लोहरा, बिमल कच्छप, प्रमोद एक्का, सोहन कच्छप, पंचम तिर्की सहित कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में पेसा नियमावली में सुधार की मांग करते हुए आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन तेज करने की बात कही।

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