
बोकारो: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने विस्थापितों के हक और अधिकार की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने का ऐलान किया है। घाटो (रामगढ़) से लेकर बोकारो तक उनके तूफानी दौरे ने विस्थापितों के बीच नई उम्मीद जगा दी है।

अपने दौरे की शुरुआत उन्होंने घाटो के सारूबेड़ा जाहेरस्थान में पूजा-अर्चना से की, जहां उन्होंने मजदूरों, किसानों और विस्थापितों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इसके बाद वे चार नंबर मोड़ पहुंचे, जहां टाटा स्टील और सीसीएल से जुड़े विस्थापितों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान का भरोसा दिया।
चम्पाई सोरेन ने अपने पुराने आंदोलनों का जिक्र करते हुए बताया कि 90 के दशक में उनके संघर्ष के कारण हजारों आदिवासी और मूलवासी मजदूरों को स्थायी नौकरी मिली थी। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि संगठित आंदोलन से ही अधिकार हासिल होते हैं।
इसके बाद वे ललपनिया स्थित आदिवासी आस्था केंद्र लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोम गाढ़ पहुंचे और प्रदेशवासियों की सुख-शांति के लिए पूजा की। बोकारो पहुंचने के दौरान बालीडीह, एलएच मोड़ और बिरसा चौक पर लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

मीडिया से बातचीत में पूर्व सीएम ने साफ कहा कि सरकार और कंपनी प्रबंधन के पास डेढ़ महीने का समय है। यदि इस अवधि में अप्रेंटिस युवाओं को नौकरी और विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो एक ऐतिहासिक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
उन्होंने यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) के जादूगोड़ा प्रकरण का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके आंदोलन के बाद जमीन देने की शर्तों में बदलाव हुआ, जिससे हजारों विस्थापितों को नौकरी मिली।
इसके अलावा उन्होंने ईचा-खरकाई डैम परियोजना का जिक्र करते हुए बताया कि उनके आंदोलन की वजह से 86 गांव डूबने से बच गए।

मोदीडीह गांव में विस्थापितों ने अपनी समस्याएं साझा करते हुए आरोप लगाया कि उनके गांवों का अस्तित्व खत्म किया जा रहा है और ऑनलाइन सरकारी प्रक्रियाओं से गांवों के नाम तक हटाए जा रहे हैं। साथ ही प्रदूषण और कंपनी प्रबंधन की मनमानी को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
दौरे के अंतिम चरण में शिबूटांड़ गांव में जनसभा को संबोधित करते हुए चम्पाई सोरेन ने कहा कि यह आंदोलन केवल उनका नहीं, बल्कि हर विस्थापित का आंदोलन होगा। उन्होंने हल-बैल चलाकर प्रतीकात्मक रूप से आंदोलन की दिशा भी तय कर दी।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तय समय में समाधान नहीं हुआ, तो राज्यभर के विस्थापित बोकारो में एकजुट होकर खाली जमीन पर हल चलाकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।