असम के बिस्वनाथ चारियाली में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जनसभा, आदिवासी अधिकारों और एकजुटता पर दिया जोर

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बिस्वनाथ चारियाली (असम): झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren आज असम के बिस्वनाथ चारियाली स्थित मेजिकाजन चाय बागान में आयोजित एक जागरूकता जनसभा में शामिल हुए। यह जनसभा आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम, जारी शक्ति और आदिवासी काउंसिल ऑफ असम द्वारा आयोजित की गई थी।


जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि असम में रहने वाले गरीब, किसान, आदिवासी, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर लंबे समय से अत्याचार और शोषण की खबरें सामने आती रही हैं।

उन्होंने कहा कि असम का चाय उद्योग यहां के मेहनतकश आदिवासी समुदाय के दम पर ही चलता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनके श्रम के अनुसार सम्मान और अधिकार नहीं मिल पा रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी भाई-बहनों को उनके परिश्रम का उचित मेहनताना नहीं मिल रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने क्रांतिकारी नेता प्रदीप नाग को याद करते हुए कहा कि आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी, जो समाज के लिए एक बड़ी क्षति है।


हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में झारखंड राज्य के गठन के लंबे संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा आदिवासी समाज के हक-अधिकार के लिए झारखंड में करीब 50 वर्षों तक आंदोलन चला। इस आंदोलन का नेतृत्व दिशोम गुरु Shibu Soren समेत कई क्रांतिकारी नेताओं ने किया, जिसके बाद अलग झारखंड राज्य का निर्माण संभव हो पाया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड राज्य बनने के बाद भी आदिवासी समाज को आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से मजबूत बनाने की चुनौती बनी रही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आदिवासी समुदाय को उनका हक और सम्मान दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है।


उन्होंने असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि आदिवासी समाज बौद्धिक रूप से मजबूत बने और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़े।


हेमंत सोरेन ने कहा कि यह विडंबना है कि हजारों वर्षों से असम में रह रहे आदिवासी समुदाय को अब तक आदिवासी का दर्जा नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को बदलने के लिए समाज को चट्टान की तरह एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में कुछ शक्तियां आदिवासी समाज को आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर करने की कोशिश करती हैं, इसलिए समाज को जागरूक रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि असम प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन की अपार संभावनाओं वाला राज्य है, और यहां के विकास के लिए आदिवासी समाज की भागीदारी बेहद जरूरी है।

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