रूपी सोरेन व्हीलचेयर पर बैठी है। बाई तरफ कल्पना सोरेन और दाई ओर सीता सोरेन और हेमंत सोरेन तीन कर्म हो रहा है। संथाली परंपरा के मुताबिक कर्म हो रहा है। गुरु जी शिवू सोरेन जहां कहीं भी होंगे इस तस्वीर को देख मुस्कुरा तो जरूर रहे होंगे। उन्होंने ता उम्र अपने लंबे चौड़े परिवार को बचाने की कोशिश की थी।


सीता सोरेन का उनके राजनीतिक परिवार से होने का मलाल तो जरूर होगा लेकिन इस तस्वीर को देखने के बाद इस बात का अफसोस नहीं कर रहे होंगे कि संस्कारों में कहीं कमी रह गई। सीता सोरेन गिलेश शिकवे भूल परिवार के साथ हैं। रूपी सोरेन के सानिध्य में बैठी सीता सोरेन अपने पति के दुर्गा सोरेन के छोटे भाई हेमंत सोरेन को पीतल की थाली में जल को स्पर्श करते हुए देख रही है। कल्पना सोरेन भी वैसा ही करती है। फिर सीता सोरेन यह परंपरा निभाती है। शिबु का परिवार एक आंगन में इकट्ठा है। आदिवासी समाज में परंपराएं किसी की व्यक्तिगत शिकायतों से अधिक महत्वपूर्ण होती है। सीता सोरेन ने गुरु जी की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा का अलविदा भले ही कहा लेकिन ना तो उन्होंने परिवार से मुंह मोड़ा और ना ही परिवार ने उन्हें इस मुश्किल घड़ी में अलगाव का एहसास होने दिया।



शिबू सोरेन का पूरा परिवार एक आंगन में इकट्ठा है। अंतयष्टि के तीसरे दिन तीसरा कर्म निभाया जा रहा है। हेमंत सोरेन सखुआ के पत्ते को उठाकर घर से नंगे पांव निकलते हैं। बारिश की वजह से सड़कों पर कीचड़ है। फिर भी झारखंड का मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारी को निभाने में कोई कसर छोड़ता हुआ नजर नहीं आता। वीर शिव सोरेन के जाने के बाद पैदा हुई शून्यता को महसूस करते हुए तालाब किनारे सखुआ के पत्ते को रखते हैं। फिर जल ढालते हैं। तीन दिन हो गए अंत्यष्टि के और चार दिन हुए आखिरी सांस लिए हुए। शिवू सोरेन का परिवार नेमरा में उन्हें जल जंगल जमीन में सौंपने के बाद धार्मिक परंपराओं में कमी नहीं रखने की पूरी कोशिश करता हुआ दिख रहा है।


घर की बहुएं कल्पना सोरेन और सीता सोरेन एक ही छत के नीचे हैं। कई दिनों तक और रहेंगी। परिवार को एकजुट देख इनके बाबा जहां भी होंगे खुश होंगे। इससे पहले सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिखा कि उन्हें नेमरा की पगडंडियों और जंगलों में दादा और पिता की याद सता रही है। हर दिन अंत्यष्टि स्थल पर पहुंच दम गुरु को याद कर रहे हैं। उन्होंने लिखा नेमरा की यह क्रांतिकारी और वीरभूमि दादाजी की शहादत और बाबा के अथा संघर्ष की गवाह है।



यहां के जंगलों, नालों, नदियों और पहाड़ों ने क्रांति की उस हर गूंज को सुना है। हर कदम, हर बलिदान को संजो कर रखा है। नेमरा की इस क्रांतिकारी भूमि को शतशत नमन करता हूं। वीर शहीद सोना सोबरन मांझी अमर रहे। झारखंड राज्य निर्माता वीर द्रोण गुरु शिव सोरेन अमर रहे। ओम ओम ओम ओम ओम ओम