रांची में सहायक आचार्यों की पोस्टिंग पर विवाद: SOP की अनदेखी का आरोप, 3 महीने बाद भी नहीं हुई सुनवाई ।

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झारखंड की राजधानी रांची में नवनियुक्त सहायक आचार्यों के विद्यालय आवंटन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। टेट सफल सहायक अध्यापक संघ ने आरोप लगाया है कि विद्यालय आवंटन प्रक्रिया में निर्धारित एसओपी (Standard Operating Procedure) की अनदेखी की गई है।


गौरतलब है कि 28 नवंबर 2025 को राज्य के माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा नवनियुक्त सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया था। यह पल अभ्यर्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण सपना था, लेकिन अब वही सपना कई शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
संघ के अनुसार, विद्यालय आवंटन में मेरिट, महिला अभ्यर्थियों, दिव्यांग उम्मीदवारों और अन्य मानवीय व सामाजिक पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। कई शिक्षकों को उनके गृह प्रखंड से 48 से 150 किलोमीटर दूर स्थित सुदूर क्षेत्रों में पदस्थापित किया गया है।


जबकि एसओपी के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि अभ्यर्थियों को 10 से 20 किलोमीटर की दूरी के भीतर या उनके गृह प्रखंड में पदस्थापन किया जाना चाहिए।


इस मुद्दे को लेकर प्रभावित अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग के विभिन्न अधिकारियों से व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से संपर्क कर आवेदन भी दिए हैं। लेकिन विद्यालय आवंटन के तीन महीने बीत जाने के बावजूद अब तक किसी भी आवेदन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।


टेट सफल सहायक अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कहा कि सभी नवनियुक्त शिक्षक अब भी विभाग से उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान पोस्टिंग को रद्द कर शिक्षकों को उनके नजदीकी विद्यालयों में पुनः पदस्थापित किया जाए।


फिलहाल, यह मामला शिक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जहां एक ओर शिक्षकों की समस्याएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।

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