कुड़ुख भाषा की तोलोंग सिकी लिपि को विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग तेज—आदिवासी छात्र संघ ने कुलसचिव को सौंपा ज्ञापन

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रांची: आज आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उराँव के नेतृत्व में रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कुड़ुख भाषा की तोलोंग सिकी लिपि को विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

19 नवंबर की महत्वपूर्ण बैठक

झारखंड सरकार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा दिनांक 19 नवंबर 2025 को आयोजित बैठक (पत्रांक 01/वि०1-31/2022 (2069)) में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिव शामिल होंगे, जिनमें—

राँची विश्वविद्यालय, राँची

विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग

सिदो–कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका

नीलाम्बर–पीताम्बर विश्वविद्यालय, मेदिनीनगर

कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा

बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, राँची

जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, जमशेदपुर


इस बैठक में तोलोंग सिकी सहित अन्य जनजातीय भाषाओं की लिपियों को विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा।

संस्कृति व पहचान की विरासत

आदिवासी समुदाय, विशेषकर कुड़ुख समाज की ओर से कहा गया है कि तोलोंग सिकी लिपि सिर्फ एक लेखन प्रणाली नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और भाषाई विरासत का प्रतीक है। इसे विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में शामिल करना भाषा संरक्षण और शैक्षणिक उन्नति के लिए आवश्यक कदम है।

विरोध करने वालों को चेतावनी

संघ ने स्पष्ट किया है कि कुछ चुनिंदा प्रोफेसर इस पहल का विरोध कर रहे हैं। संघ ने इसे ‘समाज की लिपि के प्रति असम्मान’ बताते हुए चेतावनी दी कि ऐसे किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया जाएगा।

नेताओं का बयान

केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उराँव ने कहा—
“हम अपनी सांस्कृतिक और भाषाई विरासत की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।”

जिला अध्यक्ष राजू उराँव ने कहा—
“हम सभी विश्वविद्यालयों में तोलोंग सिकी लिपि को पाठ्यक्रम में शामिल कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं और किसी भी बाधा को स्वीकार नहीं करेंगे।”

PhD स्कॉलर के मुद्दे भी उठे

संघ ने PhD स्कॉलर्स के लिए गाइड की व्यवस्था, तथा सिंडिकेट की बैठकों में उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग भी की, ताकि शोध कार्य को बेहतर दिशा और समर्थन मिल सके।

कार्यक्रम में शामिल प्रतिनिधि

कार्यक्रम में DSPMU राँची कॉलेज अध्यक्ष विवेक तिर्की, मंडर कॉलेज के पु. सचिव संदीप उराँव, बीरेंद्र मुण्डा (खालरी) सहित अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

आदिवासी छात्र संघ ने आशा व्यक्त की है कि उच्च शिक्षा विभाग और सभी विश्वविद्यालय इस सांस्कृतिक-शैक्षणिक निर्णय को शीघ्र और प्रभावी रूप से लागू करेंगे।

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