
रांची | झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के आदिवासी समाज के मुद्दे को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से कहा कि असम में आदिवासी समाज के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समुदाय को आज तक अनुसूचित जनजाति (ST) का संवैधानिक दर्जा नहीं मिला है। यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का गंभीर अन्याय है, जिसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि जिन आदिवासी लोगों को अंग्रेजों के समय उनके मूल स्थानों से लाकर असम की धरती पर बसाया गया और जिन्होंने अपने श्रम और संघर्ष से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, आज वही समाज अपनी पहचान और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है।
हेमंत सोरेन ने सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के बाद दशकों तक सरकारें बदलती रहीं, लेकिन इस समाज की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। यहां तक कि सत्ता में रही पार्टियों ने भी इस मुद्दे को अपनी प्राथमिकता में शामिल नहीं किया।

उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और पहचान का सवाल है। “जब तक न्याय अधूरा है, तब तक लोकतंत्र भी अधूरा है,” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा।
मुख्यमंत्री ने केंद्र और संबंधित सरकारों से मांग की कि असम के आदिवासी समाज को जल्द से जल्द उनका संवैधानिक अधिकार दिया जाए, ताकि उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिल सके।