लातेहार के जंगलों में शिक्षा की उम्मीद: दूरस्थ स्कूलों तक पहुँची सहायता की किरण ।

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लातेहार ज़िले के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में बसे स्कूलों तक अब शिक्षा की एक नई उम्मीद पहुँच रही है। डाल्टनगंज धर्म प्रान्त के माध्यम से दानदाताओं की मदद से इन दूर-दराज़ क्षेत्रों के बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

झारखंड के लातेहार ज़िले के बरवाड़ी प्रखंड अंतर्गत बढ़निया और मोरवाई जैसे गाँव आज भी विकास की मुख्यधारा से काफी दूर हैं। यहाँ तक पहुँचने के लिए पक्की सड़कों का अभाव है और कई बच्चे रोज़ाना पाँच से दस किलोमीटर पैदल चलकर, यहाँ तक कि बिना पुल के नदी पार कर स्कूल पहुँचते हैं।

इन कठिन परिस्थितियों में भी, क्लेरेशियन फादर्स और रांची प्रोविंस की उर्सुलाइन सिस्टर्स मिलकर शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। बढ़निया स्थित सेंट ज़ेवियर्स मिडिल स्कूल में 42 विद्यार्थी, जबकि मोरवाई के सेंट थेरेसा स्कूल में लगभग 400 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद, दोनों स्कूल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं।

24 जनवरी 2026 का दिन इन बच्चों के लिए खास बन गया, जब बिशप थियोडोर मस्कारेनहास अपनी टीम और ‘सीड्स ऑफ़ होप’ के सेमिनारियों के साथ दोनों गाँवों के दौरे पर पहुँचे। इस दौरान मोरवाई में 400 और बढ़निया में 40 स्कूल बैग बच्चों को वितरित किए गए।

मोरवाई के लिए स्कूल बैग मुंबई के डी’सिल्वा परिवार—साइमन, सवोनिया, शेरविन और सियान—द्वारा, जबकि बढ़निया के लिए डी’सूजा परिवार—एडविन, क्लेरिसा, राहेल और डैरेन—द्वारा प्रायोजित किए गए।

मोरवाई की प्रधानाचार्या सिस्टर अनीता ने इस अवसर पर धर्म प्रान्त और बिशप के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जंगलों के बीच उनकी मौजूदगी बच्चों के लिए “आशा की किरण” है। वहीं, बिशप थियोडोर ने बच्चों को दानदाताओं के लिए धन्यवाद और प्रार्थना करने का संदेश दिया।

स्कूल के सेक्रेटरी फादर राजेश बारला ने गरीबों और उपेक्षित समुदायों तक लगातार पहुँच बनाने के लिए डाल्टनगंज धर्म प्रान्त की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में बिशप थियोडोर ने सभी सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए बच्चों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में आगे बढ़ें और हमेशा मदद करने वालों को अपनी प्रार्थनाओं में याद रखें।

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