बेड़ो प्रखंड के टेरो गांव में आज एक पूजा की गई,पूजा में शामिल होने के बाद जनजाति सुरक्षा मंच झारखंड प्रदेश के सह संयोजक श्री हिंदूवा उरांव जी, समाजसेवीश्री भिखा उरांव, टेरों पंचायत के पूर्व मुखिया बिरसा उरांव,सुके उरांव जी, और टेरों गांव के लोग शामिल थे। समाजसेवी श्री भीख उरांव जी ने ग्रामीणों को बताया, रांची के मोराबादी मैदान में 4 फरवरी 2024 को होने वाला आदिवासी एकता महारैली ईसाइयों की महारैली है, इस रैली में ईसाई समुदाय के लोग शामिल हो रहे हैं, जिसका नेतृत्व चर्च के प्रतिनिधि पूर्व मांडर विधायक बंधु तिर्की के द्वारा किया जा रहा है। इस रैली में हमारे भोले भाले आदिवासियों को ठगने का प्रयास किया जा रहा है,ईशा और मूसा के पार्टी कांग्रेस प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की जल जंगल और जमीन की बात करने वाला अपने ही विधायक क्षेत्र में कितने आदिवासियों की जमीन बचाया है, खुद्दार आदिवासी की रैयत्ती जमीन में मुसलमान के ताजिया मेला लगाने के लिए मुसलमान को कब्जा दिया है। और धार्मिक और जमीनों पर चर्च , गोरोटो, कबर, एवं कुरुश गाड़ा हुआ मिलेगा।आदिवासी अपना समाज और आस्था को बढ़ाने की कोशिश तो करता है, पर गलत दिशा में चल जाता है, जो लोग समाज को समाप्त कर रहा है, उन्हीं का उंगली पढ़ते हैं हमारे आदिवासी समाज के लोग। जो धर्मांतरित ईसाइ लोगों द्वारा भारत के आजादी से पहले से लेकर अब तक धर्मांतरण करने में लगा है, और आदिवासी समाज को समाप्त कर दे रहा है, वैसे लोगों का उंगली पकड़ता है हमारा आदिवासी समाज सही दिशा में लेकर जाएगा। धर्मांतरित ईसाइयों का खुद का तो दिशा और दशा पता नहीं है, आपको क्या मार्गदर्शन देगा। आदिवासी समाज को बचाना है तो चर्च के प्रतिनिधि बंधु तिर्की जैसा, ईसाइयों के दलाल बंधन टाइगा जैसा लोगों का साथ छोड़ना होगा तभी आपको सही मार्ग मिलेगा। और पूर्व मांडर विधायक बार-बार बैक लॉक की बात करते हैं, पीछे के डोर से ईसाई मिशनरियों को नौकरी में घुसने के चलते बैक लॉक की बात करते हैं। यही यही धर्मांतरित ईसाइ हमारे भोले भाले आदिवासियों को बहला फुसलाकर, लोभ लालच देकर, चंगाई प्रार्थना के माध्यम से धर्मांतरण करते हैं, और अभी भी लगातार धर्मांतरण जारी है, और धर्मांतरित ईसाइ बताएं जब आपको स्ट का लाभ लेना हो तो, आदिवासी बन जाते हो, और मुसलमान से लाभ लेना हो तो, अल्पसंख्यक बन जाते हो, अंग्रेज से लाभ लेना हो तो, सीधा रिश्ता अंग्रेज से होता है, ऐसी स्थिति में किस मुंह से रहते हो कि हम आदिवासी हैं, इसीलिए तो डी- -लिस्टिंग करना अनिवार्य है। आदिवासियों से मेरा अनुरोध है कि एक मंच पर आकर सोच विचार कर अपनी मांग रखें।
