राष्ट्रीय जतरा महोत्सव का एक प्रतिनिधि मंडल कांके ओरमांझी के 22 पड़हा आदिवासी जतरा सदमा के ग्रामिणों से मिला और राष्ट्रीय जतरा महोत्सव के माध्यम् से आदिवासी संस्कृति,सभ्यता,परंम्परा को संरक्षित करने का संकल्प लिया। राष्ट्रीय जतरा महोत्सव के अध्यक्ष अंतू तिर्की ने कहा की झारखण्ड की राजधानी राँची के इतिहासिक मोराबादी मैदान में 31 जनवरी और 01 फरवरी को राष्ट्रीय जतरा महोत्सव होगा जिसमें झारखण्ड के अलावा दुसरे राज्यों के भी आदिवासी संगठन अपने वेश-भूषा,परंम्परा,संस्कृति,सभ्यता के साथ जतरा में शामिल होंगे, पुरा झारखण्ड,राँची ढोल-नगाड़ों की आवाज से गूंजेगा। जिला परिषद् ओरमांझी के कमिश्नर मुण्डा ने कहा की राष्ट्रीय जतरा महोत्सव समिति का परियास सराहनीय है जिससे समाजिक समरसता बढ़ेगी जतरा में एक दुसरे से मिलने-जुलने,दुःख-सुख बताने का अवसर मिलता है।आदिवासियों के शुभ कार्य शादी विवाह आदि की शुरूआत भी होती है योग्य युवक युवतियों की शादी विवाह की बात घरों में कि जाती है।मौके पर राष्ट्रीय जतरा महोत्सव के महासचिव नीलम बिरूली ने कहा राज्य भर के समस्त आदिवासी समाज एवं संगठन के परिवार जन को राष्ट्रीय जतरा महोत्सव के तरफ से आमंत्रण करते हैं एवं अपने अपने पारंपरिक वेश भूषा और वाद्य यंत्रों के साथ बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें।मिडिया प्रभारी राजकिशोर साहू,सक्रिया सदस्य हेमलाल मेहता 22 पड़हा अध्यक्ष बाबूलाल महली ,जिला परिषद ओरमांझी कमिश्नर मुंडा, पूर्व मुखिया चंद्रा रमेशचंद्र उरांव ,पूर्व मुखिया सदमा हरी लाल मुंडा लोकल मुंडा रवि मुंडा डिस्को मुंडा जेठू मुंडा बबलू मुंडा अमित पहान एवं भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
