झारखंड हाईकोर्ट ने सीजीएल-2023 परीक्षा पर फैसला सुरक्षित रखा, रिजल्ट पर रोक बरकरार — सरकार बोली, पेपर लीक का कोई सबूत नहीं

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झारखंड हाईकोर्ट ने सामान्य स्नातक योग्यता संयुक्त प्रतियोगिता (सीजीएल)-2023 के तहत 21 व 22 सितंबर को ली गई परीक्षा में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच को लेकर दायर पीआईएल पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा व जस्टिस नवल किशोर चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने सभी पक्षों को अपने लिखित बहस नौ नवंबर तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने सीजीएल परीक्षा के रिजल्ट प्रकाशन पर लगी रोक (अंतरिम ऑर्डर) को बरकरार रखा।

पहले वेरिफिकेशन में सफल अभ्यर्थियों दीपक उरांव व अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शंभु शंकर नारायण, राजीव कुमार व अन्य ने बहस रखा। उन्होंने कहा कि परीक्षा लीक के आरोप आधारहीन हैं। ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह सिद्ध होता हो कि पेपर लीक हुआ है। बल्कि कुछ अभ्यर्थियों के पास एक समान प्रश्न आने से संदेह मात्र है। इसलिए सीबीआई जांच का औचित्य नहीं है।

मामले की सीबीआई से जांच की मांग पर हो रही सुनवाई हाईकोर्ट में सभी पक्षों को लिखित बहस प्रस्तुत करने का  निर्देश दिया वही सीजीएल परीक्षा-2023 के रिजल्ट प्रकाशन पर रोक बरकरार रखा गया है सरकार ने कहा है कि – पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला है।


राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता प्रियंशु पटेल व विनोद कुमार ने खंडपीठ के समक्ष स्पष्ट किया कि सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक होने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। सीआईडी की जांच में अभी तक पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला है। प्रेस में छपी खबरों और लीक का नाम लेकर सोशल मीडिया में फैलाई गई बातें निराधार हैं। संजीव मरांडी नामक व्यक्ति की गिरफ्तारी जरूर हुई है और उससे गहन पूछताछ हुई, लेकिन उसने भी गैर कानूनी गतिविधि की बात नहीं कही। कुछ अभ्यर्थियों ने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की है।

महाधिवक्ता ने कहा कि सीआईडी की जांच जारी है, लेकिन सही जांच पूरी हुए बिना सीबीआई जांच की मांग उचित नहीं है। उन्होंने रिजल्ट पर लगी रोक हटाने व याचिका को खारिज करने का आग्रह किया। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेपीएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल व अधिवक्ता प्रिय कुमार उपस्थित थे।

सरकार ने कहा कि जिस तरह से कुछ अभ्यर्थी दो दिन की परीक्षा के खत्म के बाद दूसरी omr बना दी, वह गलत है। अनुसंधान सही दिशा में जा रहा है। सीबीआई जांच के लिए कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत को चाहिए कि मामले को सीबीआई के हेंडओवर करने का आदेश न दे।

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