
रांची | 13 फरवरी 2026
केंद्रीय सरना समिति द्वारा शुक्रवार को वीरता और बलिदान के प्रतीक महानायक वीर बुधु भगत की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर रांची स्थित केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय कार्यालय, 13 आरआईटी बिल्डिंग, कचहरी परिसर में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की ने वीर बुधु भगत के अद्वितीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जन्म 17 फरवरी 1792 को रांची के सिलागाई गांव में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजों के शोषण और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और वर्ष 1831–32 के कोल विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभिक आंदोलनों में से एक माना जाता है।

श्री तिर्की ने बताया कि वीर बुधु भगत ने अपने साहस और नेतृत्व से अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी थी। अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए एक हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इस संघर्ष में उनके पुत्र हलदार गिरधर सहित हजारों आदिवासियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। वीर बुधु भगत ने अंग्रेजों से घिर जाने के बावजूद आत्मसमर्पण नहीं किया और वीरगति को प्राप्त हुए, जिससे वे आदिवासी समाज और देश के लिए अमर प्रेरणा बन गए।
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय सरना समिति के वरीय उपाध्यक्ष प्रमोद एक्का, सचिव विनय उरांव, पंचम तिर्की, जय राम किस्पोट्टा, राहुल केरकेट्टा, दीपक जयसवाल सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने वीर बुधु भगत के बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को वीर बुधु भगत के बलिदान और संघर्ष से अवगत कराना तथा उनके योगदान को सदैव स्मरण रखना था।