
रांची : झारखंड सरकार ने अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून (PESA Act) को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना जारी होते ही यह कानून राज्य के अनुसूचित इलाकों में तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पेसा कानून के लागू होने से अब ग्रामसभा को अभूतपूर्व और ऐतिहासिक अधिकार मिल गए हैं, जिससे ग्राम स्वराज की अवधारणा को मजबूती मिली है।
इस कानून के लागू होने के बाद अब ग्रामसभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का भूमि अर्जन नहीं किया जा सकेगा। इसके साथ ही ग्रामसभा को विकास योजनाओं की स्वीकृति, सामाजिक विवादों के निपटारे, स्थानीय संसाधनों के संरक्षण और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे कई अहम अधिकार भी प्राप्त हो गए हैं।
🔹 ग्रामसभा को मिले ऐतिहासिक अधिकार
पेसा कानून के तहत अब ग्रामसभा अपने क्षेत्र में होने वाले हर बड़े फैसले की निर्णायक संस्था होगी। खनन, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, विस्थापन, उद्योग स्थापना या किसी भी विकास परियोजना को शुरू करने से पहले ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य होगी। ग्रामसभा चाहे तो किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार भी कर सकती है।
🔹 विकास योजनाओं पर ग्रामसभा की सीधी पकड़

अब केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्रामसभा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। योजना की स्वीकृति से लेकर लाभुकों के चयन और निगरानी तक ग्रामसभा की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
🔹 सामाजिक न्याय और विवाद निपटारे का अधिकार
पेसा कानून के अंतर्गत ग्रामसभा को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार छोटे सामाजिक और भूमि विवादों के निपटारे का अधिकार मिला है। गांव स्तर पर ही न्याय मिलने से ग्रामीणों को अब थाना और कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
🔹 ग्रामसभा को आर्थिक अधिकार
ग्रामसभा को स्थानीय बाजार, हाट-बाजार, जल, जंगल और जमीन से जुड़े संसाधनों पर नियंत्रण का अधिकार दिया गया है। साथ ही शराब, नशा और सामाजिक बुराइयों पर नियंत्रण का फैसला भी ग्रामसभा ले सकेगी।
🔹 प्रशासनिक फैसलों में ग्रामसभा की भागीदारी
अब ग्रामसभा की अनुशंसा के बिना पंचायत सचिव, ग्राम सेवक और अन्य स्थानीय पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकेगी। पुलिस और प्रशासन को भी ग्रामसभा के निर्णयों का सम्मान करना होगा।
🔹 अनुसूचित क्षेत्रों में लागू होगा कानून
यह कानून राज्य के अनुसूचित जिलों और प्रखंडों में लागू किया गया है, जहां आदिवासी आबादी अधिक है। इन इलाकों में ग्रामसभा को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त होगा और बाहरी हस्तक्षेप पर रोक लगेगी।
🔹 सरकार का दावा
राज्य सरकार का कहना है कि पेसा कानून लागू होने से आदिवासी समाज को उनका संवैधानिक अधिकार मिलेगा। यह कानून जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय विकास को नई दिशा देगा। सरकार के अनुसार, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और ग्राम स्वराज की स्थापना होगी।
🔹 ग्रामीणों में खुशी की लहर
पेसा कानून लागू होने की खबर से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि अब वे अपने गांव के फैसले खुद ले सकेंगे और बाहरी दबाव से मुक्ति मिलेगी।