जनजाति सुरक्षा मंच, झारखण्ड के नेतृत्व में एक प्रेसवार्ता की गई जिसमें आगामी 31 जनवरी 2024 को झारखण्ड के सभी 24 जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय धरना सह ज्ञापन माननीय मुख्यमंत्री एवं महामहिम राज्यपाल महोदय झारखण्ड के नाम से निर्धारित है जिसमें निम्नलिखित मांग की जाती है –

(1) जिस प्रकार विषेष सत्र बुलाकर विधानसभा से सरना धर्म कोड विधानसभा से पारित किया गया है उसी प्रकार विधानसभा से जनजाति सुरक्षा मंच मांग करता है कि विषेष सत्र बुलाकर डीलिस्टिंग बिल भी सर्वसम्मति से पारित करने की कृपा करें। डीलिस्टिंग यानि जो जनजाति अपनी धर्म-संस्कृति, परम्परा, रूढ़ी प्रथा छोड़कर इसाई या मुस्लिम धर्म अपना लिए हैं वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करना है या डीलिस्टिंग करना है अर्थात् वैसे लोगों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ न मिले यही डीलिस्टिंग है।
(2) आगामी 4 फरवरी 2024 को आदिवसासी एकता रैली मूल जनजातियों की रैली नहीं बल्कि ईसाईयों की रैली है। जिसने घर-घर को तोड़ा, माँ-पिता से बेटा-बेटी को अलग किया, भाई-भाई को तोड़ा तो किस मुँह से आदिवासी एकता की बात करते हैं। ये मूल जनजातियों को ईसाइयों के द्वारा गुमराह करने की एक सोची समझी साजिस है, इसलिए जनजाति सुरक्षा मंच, झारखण्ड प्रदेष के मीडिया प्रभारी श्री सोमा उरांव आप सबों को जोहार, प्रणाम करते हुए विन्रम भाव से आग्रह कर रहे हैं कि यदि आप अपना बेटा-बेटी, सगे संबंधियों का नौकरी चाहते हैं, तो इस रैली में शामिल न हो तथा बेटा-बेटी, सगे संबंधियों का नौकरी चाहते हैं तो जनजाति सुरक्षा मंच का साथ दें ताकि आनेवाले पीढ़ी (बेटा-बेटी) के लिए नौकरी सुरक्षित करें।
(3) आदिवासी एकता तभी संभव है, जब धर्मातरित व्यक्ति जिन्होंने अपनी रूढ़ी प्रथा को छोड़ दिये हैं और इसाई या मुस्लिम धर्म अपना लिये हैं वे सभी व्यक्ति पुनः अपनी रूढ़ी प्रथा में वापस आयेंगे? तभी एकता रैली संभव है नहीं तो नहीं। इसलिए जनजाति सुरक्षा मंच आप सभी से आवाह्न करता है कि आप स्व. कार्तिक उराँव जी की जन्म शताब्दी वर्ष के अन्दर पुनः अपने स्वःधर्म में वापस आयें अन्यथा आप लोगों का डीलिस्ट होना तय है।
(4) अभी वर्तमान समय में ईसाई धर्मावलम्बी सभी केन्द्र सरकार एवं झारखण्ड सरकार का आरक्षण रोस्टर पिछड़ी जाति में सूचीबद्ध है और वे जनजाति का आरक्षण का लाभ ले रहे रहैं, इस पर सरकार अविलम्ब रोक लगाये। यही कारण है कि इतना-इतना आरक्षण होने के बावजुद भी आदिवासी गरीब एवं मजदूरी तथा दाई काम करने के लिए मजबूर हैं।
(5) वर्तमान समय में जो जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो रहा है, उस जाति प्रमाण पत्र में पिता के नाम के साथ-साथ पति का नाम होना अनिवार्य हो ताकि जनजाति का आरक्षण का लाभ अन्य नहीं ले सकें।
इस प्रेसवार्ता में जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव, मेघा उरांव, संदीप उराँव, हिन्दुवा उरांव, सन्नी उरांव, प्रदीप टोप्पो, सुषील मराण्डी, अंजली लकड़ा, जयमंत्री उरांव, दुर्गा उरांव, जगरनाथ भगत, मनोज भगत व अन्य उपस्थित थे।
