जादूगोड़ा की चीख : यूरेनियम रेडिएशन का दर्द और न्याय की पुकार

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झारखंड की धरती, जिसने सदियों से प्रकृति की गोद में आदिवासी–मूलवासी समुदाय को पाला–पोसा, आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है।
पूर्व विधायक सह जननेता देवेन्द्र नाथ महतो ने पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा क्षेत्र का दौरा कर वहां के हालातों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया, जहां स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवन पर पड़ रहे भयावह प्रभाव को दर्द भरी आंखों से बयां किया।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यूरेनियम खनन और रेडियोधर्मी कचरे के कारण पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि—


हर 3 में 1 व्यक्ति किसी न किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है

जन्मजात शारीरिक विकृतियों वाले शिशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है

महिलाओं को गर्भधारण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है

दूषित हवा, पानी और मिट्टी से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है


देवेन्द्र नाथ महतो ने जनता की पीड़ा को सुनते हुए कहा—

“यहां के लोगों को विकास नहीं, विनाश मिला है। प्राकृतिक संसाधन यहां से जा रहे हैं, लेकिन उसका दुष्प्रभाव यहीं के लोगों को झेलना पड़ रहा है। यह अन्याय बंद होना चाहिए और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।”





स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि—

“धातु हैदराबाद जाती है, लेकिन कचरा वापस जादूगोड़ा लौट आता है। जैसे केला कोई और खाए और छिलका हमारे आंगन में फेंक दे।”



जनता अब मांग कर रही है कि—

✔ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सर्वे और मेडिकल कैंप लगाए जाएं
✔ रेडिएशन स्तर की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो
✔ पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले
✔ रेडियोधर्मी कचरे के प्रबंधन में पारदर्शिता हो
✔ आदिवासी–मूलवासी समुदाय का जीवन सुरक्षित किया जाए

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