
कांके क्षेत्र अंतर्गत बोडेया गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं सांस्कृतिक उत्साह के साथ सोहराय पर्व मनाया गया। इस अवसर पर केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की ने अपने गांव बोडेया में रूढ़िवादी परंपरा और संस्कृति के अनुरूप गोहाल पूजा (गोहार पूजा) संपन्न की।
पूजा से पूर्व बैलों को नदी में स्वच्छ जल से स्नान कराया गया तथा गोहाल (गोहल) की पूजा की गई। इसके बाद पशुओं का श्रृंगार किया गया, उनके शरीर पर रंग-बिरंगे पारंपरिक चित्र बनाए गए, दोनों सींगों में तेल, सिंदूर और अरवा चावल अर्पित किया गया। पशुओं के गले में फूलों की माला पहनाई गई और उन्हें उड़द, चावल का दाना तथा डुंबू पिठा खिलाया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष श्री फूलचंद तिर्की ने कहा कि सोहराय पर्व कृषि आधारित त्योहार है — यह किसान और पशु के अटूट संबंध एवं परिश्रम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “फसल की उपज में किसान और पशु दोनों का समान योगदान होता है, इसलिए सोहराय पर्व दोनों के सम्मान का पर्व है।”
उन्होंने आगे कहा कि सोहराय पर्व आदिवासी समाज की रूढ़िवादी परंपरा और संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, जो समुदाय की एकता, प्रकृति प्रेम और श्रम-संस्कृति की गहरी भावना को दर्शाता है।

