
रोम में निवास कर रहे आभास (अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय) के सदस्यों ने समुदाय के अध्यक्ष फा. विजय टोप्पो के नेतृत्व में शांति और एकता के प्रतीक संत फ्रांसिस ऑफ असीसी की जन्मभूमि और कर्मभूमि असीसी की एक पवित्र तीर्थयात्रा सम्पन्न की।
यह यात्रा आभास समुदाय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गई, क्योंकि पहली बार रोम में रहने वाले आदिवासी भाई-बहन एक साथ रोम से बाहर इस आध्यात्मिक यात्रा पर निकले।
रोज़री माला जपते और भजन गाते हुए सभी श्रद्धालुओं ने विश्व-शांति तथा प्रत्येक व्यक्ति को शांति-दूत बनने की प्रेरणा के लिए विशेष प्रार्थनाएँ कीं। असीसी पहुँचकर उन्होंने संत फ्रांसिस द्वारा रचित प्रसिद्ध प्रार्थना—
“प्रभुवर, मुझे अपनी शांति का प्रचारक बना”
—को बड़े ही श्रद्धा और भावनाओं के साथ गाया।
तीर्थस्थलों के दर्शन के क्रम में समुदाय ने संत फ्रांसिस के जन्मस्थान, उनकी पवित्र कब्र, संत दामियन, संत क्लारा और संत कार्लो अकुतिस के समाधि-स्थलों का दर्शन किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने उनके जीवन से प्रेरणा और सेवा की भावना को गहराई से आत्मसात किया।

तीर्थयात्रा का समापन पवित्र मिस्सा बलिदान से हुआ, जिसकी अध्यक्षता फा. ख्रिस्ती, एस.जे. ने की। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि “हमें संत फ्रांसिस के जीवन से प्रेरणा लेकर विश्व में शांति और भाईचारे के दूत बनने का संकल्प लेना चाहिए।”
इस ऐतिहासिक तीर्थयात्रा में कुल 46 आदिवासी भाई-बहनों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर संत जेवियर कॉलेज, राँची के प्रिंसिपल फा. रोबर्ट प्रदीप कुजूर, एस.जे. भी उपस्थित थे।
यह यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुभव थी, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक भी बनी, जिसने आभास समुदाय के सभी सदस्यों के बीच भाईचारे, सेवा और शांति का भाव और गहरा कर दिया।