एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) के कर्मचारी एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं. वर्षों से वेतन, चिकित्सा सुविधा और रोजगार की स्थिरता को लेकर संघर्ष कर रहे कर्मचारियों का गुस्सा अब उबाल पर है. सप्लाई संघर्ष समिति के बैनर तले मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन जारी है.
दरअसल, कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय, आंदोलन को दबाने के प्रयास में जुटा है. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें बार-बार मजबूर किया जा रहा है कि वे अपनी मजदूरी छोड़कर आंदोलन करें, ताकि उनकी आवाज शासन और प्रबंधन तक पहुंचे. वे कहते हैं कि ये लड़ाई केवल वेतन की नहीं बल्कि सम्मान की है।

प्रबंधन पर हथकंडा अपनाने का आरोप:-
समिति के सदस्य मनोज पाठक ने कहा कि, प्रबंधन आंदोलन को कमजोर करने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रहा है. उन्होंने साफ किया कि आउटसोर्सिंग का हर हाल में विरोध किया जाएगा, क्योंकि इससे कर्मचारियों के भविष्य पर संकट और गहराता है.
आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक समर्थन:-
आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है. आजसू के वरिष्ठ नेता देवशरण भगत, हसन अंसारी और प्रवीण प्रभाकर ने आंदोलनरत श्रमिकों से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया है. इस पूरे मामले पर देवशरण भगत ने कहा, इन कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं, लगातार उत्पादन देने वाले इन मजदूरों को उपेक्षित नहीं किया जा सकता, हम इस मुद्दे को केंद्रीय नेताओं के समक्ष भी रखेंगे.
सवालों के घेरे में HEC प्रबंधन:-
इधर, आजसू नेता प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि HEC प्रबंधन लंबे समय से सवालों के घेरे में है. देश की इस प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की आर्थिक स्थिति लगातार गिरती जा रही है और इसका सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ रहा है. न नियमित वेतन है, न स्वास्थ्य सुविधा और न ही भविष्य को लेकर कोई आश्वासन है.
वहीं कर्मचारी बताते हैं कि कई बार लिखित और मौखिक अनुरोध के बाद भी, अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. आंदोलनकारी श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वह काम का बहिष्कार कर सामूहिक भूख हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाने पर मजबूर होंगे. आंदोलन पर डटे कर्मचारियों का मानना है कि जब तक सरकार और HEC प्रबंधन कोई ठोस पहल नहीं करते, तब तक यह संघर्ष थमने वाला नहीं है

कर्मचारियों की प्रमुख मांग इस प्रकार हैं:-
• वेतन और बकाया भुगतान की तत्काल व्यवस्था
• मेडिकल भत्ता और स्वास्थ्य सुविधा बहाली
• आउटसोर्सिंग नीति पर तत्काल रोक
• स्थायी नियुक्तियों को प्राथमिकता
• कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का अधिकार