ठंड में खुले आसमान के नीचे जिंदगी, डीआईजी ग्राउंड की दर्दनाक हकीकत ।

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रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजधानी रांची के रिम्स को लेकर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के बाद रिम्स प्रबंधन और जिला प्रशासन द्वारा अंतिम दिन अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया।

नव वर्ष से पूर्व ही रिम्स के जमीन पर की गई अतिक्रमण पर ताबड़तोड़ बुलडोजर कार्रवाई की गई जिस बीच बरियातू के डीआईजी ग्राउंड के समीप 100 से ज्यादा मकान और दुकानों को ध्वस्त किया गया अब कार्रवाई के बाद की तस्वीर बेहद हृदय विदारक है। राजधानी रांची में ठंड का प्रकोप इस कदर है कि स्कूलों को बंद किया जा रहा है मौसम द्वारा अलर्ट जारी किया गया है लेकिन इस बीच डीआईजी ग्राउंड में परिवार खुले आसमान में ही जीवन यापन करने को मजबूर है बच्चे बिना छत के ही पढ़ाई कर रहे हैं।

जोरदार ठंड लेकिन रहने को छत नहीं


किसी भी शहर के विकास के लिए अतिक्रमण हटाना आवश्यक होती है जिस कारण हाईकोर्ट ने रिम्स के जमीन से अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया था जिसका पालन करते हुए प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई। लेकिन इस कार्रवाई की दूसरी पहलू भी है जो काफी दर्दनाक है। दरअसल डीआईजी ग्राउंड के समीप ऐसे कई जुग्गी झोपड़ी थे जहां लोग काफी वर्षों से रह रहे थे अब अचानक आशियाने के टूटने से लोग बेघर हो गए।

स्थानीय निवासी रतना टोप्पो का कहना है कि उनके कई पुश्त इसी जमीन में रहते हैं वे रैयत है रिम्स को जमीन मुहैया कराया था लेकिन ना नौकरी हुई ना मकान मिला और जो था वह भी छीन लिया गया उनका कहना है इस ठंड में परिवार के साथ कहा जायेंगे मूल रूप से यही के निवासी है उसके बावजूद यह कार्रवाई हुई है प्रशासन रहने के लिए कम से कम छत दे ताकि जीवन यापन सही ढंग से हो पाए।

घर टूट गया लेकिन हौसला नहीं उसी जमीन में रहने को मजबूर


वहीं रीना टोप्पो बताते हैं कि चूंकि हम मूल निवासी है डीआईजी ग्राउंड की यह जमीन छोड़कर और कही भी जमीन जायदात नहीं है जो है यही है। उन्होंने कहा अब घर पूरी तरीके से तोड़ दिया है लेकिन हम खतियान धारी हैं इसी जमीन में रहेंगे जब तक हमें राज्य सरकार से दूसरा मकान ना मिल जाता टूटे हुए। लोगों का कहना है अब टूटे घर के बाहर ही किसी तरह झोपड़ीनुमा घर बनाकर रह रहे हैं और कोई रास्ता भी नहीं है।  बताती हैं कि उनके चार पुस्त भी यहां रह चुके सब कुछ यही है अब पूरा परिवार असहाय हो चुका है नव वर्ष भी टूटे घर के बाहर ही मनाई गई अब इस कड़ाके की ठंड भी झेलना पड़ रहा है।

नन्हे हाथों में किताब सिर पर कोई छत नहीं

अतिक्रमण हटाओ अभियान का साइड इफेक्ट छोटे छोटे बच्चों पर भी दिख रहा है। राजधानी रांची में मौसम विभाग के द्वारा अलर्ट जारी कर दिया गया है लोगों को हिदायत दी जा रही है ठंड से बचने के लिए वही रांची के स्कूलों को 6 जनवरी तक बंद करने का निर्देश दिया गया है लेकिन इस बीच डीआईजी ग्राउंड के समीप तोड़े गए जुग्गी झोपड़ियों में रह रहे बच्चों के लिए कोई सुविधा नहीं है। छोटे बच्चे खुले आसमान में टूटे हुए पत्थर पे बैठकर  किताबों के साथ पढ़ाई कर रहे थे। लोगों की मांग है इन बच्चों के प्रति राज्य सरकार और जिला प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए कोई व्यवस्था करे।

कार्रवाई के बाद लोगों में आक्रोश


बढ़ते हुए ठंड के बीच खुले आसमान में रात गुजार रहे बुधवा उरांव कहते हैं कि अफसरों के द्वारा जोरो शोरों से घरों को तोड़ा गया लेकिन अब कैसे हम रह रहे हैं इसकी चिंता किसी को नहीं है। उन्होंने बताया हमारे पास पैसे भी नहीं है कि हम किराए के मकान पर चल जाए अधिकारी अगर आते तो हाल देखते कैसे खुले में पूरा दिन गुजर रहा है सरकारी योजना चल रहे हैं उसके तहत मकान अगर मुहैया होगा तो पूरा परिवार बेघर होने से बच जाएगा। लोगों का कहना है वोट मांगने समय नेता उन्हीं के पास आते हैं लेकिन अब जब वे परेशान तो कोई नेता उनका हाल चाल जानने भी नहीं आ रहा है। संजू टोप्पो आक्रोशित होकर कहते है कि वोट का भी बहिष्कार अब किया जाएगा नेता आदिवासी समाज के हित की बात करते हैं लेकिन जब हम आदिवासी सड़क पर आ गए तब किसीको चिंता नहीं हो रही है ।

महिलाओं को करना पड़ रहा है परेशानियों का सामना


वहीं, डीआईजी ग्राउंड के समीप आदिवासी परिवारों के घर टूटने पर सीधा असर आम जनमानस के जीवन पर देखने को मिल रहा है। घर टूटने के बाद अब पूरा परिवार सर्द रात खुले आसमान में ही गुजार रहे हैं इस बीच महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है स्थानीय महिला का कहना है कि टूटे हुए घरों के मलबे अंधेरी रात में दुर्घटना होने का डर लगा रहता है लेकिन मजबूरी के कारण इसी टूटे आशियाना के बाहर ही रहने को मजबूर है।

झारखंड सरकार से अपील


रिम्स प्रबंधन द्वारा चलाई गई अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद बरियातू के डीआईजी ग्राउंड के समीप रह रहे परिवारों ने झारखंड सरकार से अपील की है कि उनके दर्द को महसूस करते हुए मदद पहुंचाया जाए छत प्रदान किया जाए क्योंकि ठंड में बेघर हुए परिवार के साथ रहना बेहद कठिन होता जा रहा है।

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