आज 4 फरवरी को मोराबादी मैदान में जो आदिवासी एकता रैली बुलाई गई थी, पूर्णता वह ईसाइयों की रैली थी। इस रैली में मैं मूल जनजातियों से निवेदन किया था कि यदि आप अपना अपना बेटा बेटी का नौकरी चाहते हैं तो इस रैली में शामिल न हो क्योंकि यह रैली ईसाइयों की रैली है और यह बात साबित हो गई और यह रैली पूरी तरह से फ्लॉप हो गई। मैं मूल जनजातियों को धनबाद एवं आभार प्रकट करता हूं कि उन्होंने मेरी बातों को स्वीकार किया और इस रैली में शामिल नहीं हुए। क्योंकि 24 दिसंबर 2023 की उलगुलान आदिवासी डी लिस्टिंग महारैली के बाद चर्च एवं ईसाइयों में खलबली मच गई है तथा वे जान गए हैं की अब तक जो मूल जनजातियों का आरक्षण हम सभी खाँ का रहे हैं अब वह आरक्षण का लाभ नहीं खाँ पाएंगे क्योंकि मूल जनजाति अब जाग गए हैं इसी को लेकर आदिवासी एकता रैली के नाम पर ईसाइयों की रैली बुलाई गई थी जो पूरी तरह फ्लॉप हो गई।

वैसे भी ईसाइयों को भारत सरकार का आरक्षण का रोस्टर एवं झारखंड सरकार का आरक्षण का रोस्टर में पिछड़ी जाति में रखा गया है और आरक्षण जनजाति का खा रहे हैं आखिर ऐसा क्यों।आने वाले दिनों में चाहे कोई भी पार्टी हो , लोकसभा हो या विधानसभा हो जनजाति का आरक्षित सीट पर धर्मांतरित ईसाइयों को टिकट नहीं दे क्योंकि बंधु दादा का चिट्ठी के माध्यम से PILहोने जा रहा है, साथ ही साथ भारत सरकार का आरक्षण का रोस्टर एवं झारखंड सरकार का आरक्षण का रोस्टर के साथ माननीय मुख्यमंत्री एवं महामहिम राज्यपाल महोदय को आवेदन दिया जाएगा इतना में भी काम नहीं बनता है तो इस पर भी एक pIL की तैयारी की जा रही है साथ ही साथ आने वाले दिनों में जनजाति सुरक्षा मंच 5 लाख लोगों की संख्या के साथ दिल्ली में धरना प्रदर्शन कर संसद घेराव का कार्यक्रम बन रहा है ।अभी भी धर्मांतरित इसाई यदि अपना मूल धर्म रूढिप्रथा में वापस आना चाहते हैं, तो स्वर्गीय कार्तिक उरांव के जन्म शताब्दी तक वापस आ सकते हैं अन्यथा आप सभी धर्मांतरित ईसाइयों का डिलिस्ट होना लगभग तय है,। अब आप सभी धर्मांतरित लोग मूल जनजातियों का आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते हैं क्योंकि मूल जनजाति अपना हक और अधिकार को जान चुके हैं। इस रैली में जो मूल जनजाति नहीं आए हैं वैसे मूल जनजातियों को मैं पुनःएक बार धन्यवाद एवं आभार प्रकट करता हूं। आज की आदिवासी एकता रैली पूरी तरह फ्लॉप हो चुकी है।
