आदिवासी एकता रैली के बारे में लोगों को सावधान करने हेतु, जनजाति सुरक्षा मंच ने किया प्रेसवार्ता।

Spread the love

जनजाति सुरक्षा मंच, झारखण्ड के नेतृत्व में एक दिवसीय प्रेसवार्ता की गई जिसमें पूर्व मंत्री सह कांग्रेस के नेता श्री बंधु तिर्की के द्वारा आहूत आगामी 4 फरवरी 2024 को राँची के एतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता रैली के बारे में लोगों को सावधान करने हेतु आग्रह किया जाता है। आगामी 4 फरवरी 2024 को कांग्रेस पार्टी के नेता सह पूर्व मंत्री इसाई श्री बन्धु तिर्की के द्वारा आदिवासी एकता महारैली के बारे में लोगों को सावधान करना चाहते हैं। विदित हो कि कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर आदिवासियों/जनजातियों का भला नहीं कर सकती है। सत्र 1967-70 के दषक में बाबा कार्तिक उरांव के द्वारा 348 सांसदों का हस्ताक्षरयुक्त एक प्रस्ताव सदन में पेष किये थे उस समय कांग्रेस की ही सरकार थी और उस बिल में था कि जो जनजाति अपनी मूल जनजाति, धर्म-संस्कृति, परम्परा, रूढ़ी प्रथा इत्यादि छोड़ दिये हैं उसको अनुसूचित जनजाति नहीं समझा जाय। लेकिन तत्कालिन प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गांधी को विदेष से एक फोन आने के बाद ही सदन को यह बिल स्थगित करना पड़ा जो आजतक बिल जैसा का तैसा पड़ा हुआ है। अगर उस समय कांग्रेस पार्टी चाहती तो वह बिल पास हो जाता और मूल जनजातियों का हक एवं अधिकार स्वतः मिल जाता परन्तु ऐसा न करके मूल जनजातियों के आरक्षण का लाभ धर्मान्तरित इसाई ले रहे हैं। श्री बन्धु तिर्की भी कांग्रेस पार्टी के नेता हैं और वे मूल रूप से इसाई हैं और मूल रूप से चर्च का प्रतिनिधित्व करते हैं। बन्धु तिर्की के द्वारा यह आहूत रैली इसाई और कांग्रेस पार्टी की है। आप सभी ग्रामिणों को मैं प्रणाम करता हूँ और आग्रह कर रहा हूँ कि इस रैली में शामिल ना हों क्योंकि आजतक मूल जनजातियों के आरक्षण का लाभ धर्मान्तरित इसाई/मुस्लिम ले रहे हैं। यदि आप अपने भाई-भतीजे, बेटा-बेटी, चाचा-चाची, संगे-संबंधियों का नौकरी चाहते हैं तो इस रैली का विरोध करें और यदि अपनी बेटा-बेटी, चाचा-चाची, संगे-संबंधियों का नौकरी नहीं चाहते हैं और इसाईयों/मुसलमानों को देना चाहते है तो खुलकर शामिल होइए। यह निर्णय मैं आपके ऊपर छोड़ता हूँ। यदि बेटा-बेटी का नौकरी चाहते हैं तो जनजाति सुरक्षा मंच का साथ दीजिए और नहीं चाहते हैं तो इसाईयों द्वारा आहूत रैली (4 फरवरी 2024) बन्धु तिर्की के रैली में शामिल होइए। जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी श्री सोमा उरांव ने कहा कि मैं जनजाति हिन्दू एक नम्बर का हूँ और वर्तमान में राँची जिला कांके प्रखण्ड के बोडे़या पंचायत का मुखिया हूँ एवं राँची जिला मुखिया संघ का अध्यक्ष भी हूँ। जिसको डीलिस्टिंग करना है करके दिखाए? जबतक भारतीय संविधान है तबतक मैं हिन्दु हूँ और रहूँगा। दुनिया की कोई ताकत मुझे हिन्दु और हिन्दु कहने से रोक नहीं सकता है। डीलिस्टिंग करने हेतु यदि संविधान में संषोधन होता है या कानून बनता है तो पहला डीलिस्टिंग पूर्व मंत्री श्री बन्धु तिर्की का करूंगा। ऐसे आनेवाले कोई भी जनजाति विधानसभा/लोकसभा क्षेत्र से अब पूर्व मंत्री बन्धु तिर्की को चुनाव लड़ने नहीं दूंगाँ। यदि उसे लड़ना है तो जेनरल सीट से लड़े क्योंकि बन्धु तिर्की का इसाई धर्म का अभिप्रमाणित कागज मिल चूका है। वे लोगों को आदिवासी-आदिवासी कहकर बरगलाना बंद करे और बोले कि मैं इसाई हूँ।

इन सभी बातों को देखकर/सुनकर बन्धु तिर्की बौखुला जाएगे या उतावला भी हो जायेंगे और अपने आदिमियों को मीडिया प्रभारी सोमा उरांव को मारने के लिए भेजेंगे, बताते चले कि यही बन्धु तिर्की जब सरना स्थल में काली बछिया का बलि दिया जाता है कहके बयान दिये थे। उस समय भी सोमा उरांव ने इसका कड़ा विरोध किया और पूर्व मंत्री बन्धु तिर्की का पुतला दहन भी किया गया था। सरना स्थल में काली बछिया के बलि देने का कोई प्रवधान नहीं है। उस समय भी बन्धु तिर्की सोमा उरांव को फोन से धमकाए थे और आदमी भी भेजे थे मारने के लिए। बन्धु तिर्की जो बोले वो सही है, उसे मानिए तो ठीक नहीं तो गलत। तो ऐसा नहीं चलेगा अब जनजाति समाज जाग चूका है। आपका दोहरा चरित्र को सभी जनजाति जान व समझ गए हैं अब वैसा नहीं चलेगा। इसी प्रकार बोडे़या गांव का सरना स्थल का घेराबंदी हेतु सरकार द्वारा आंवटन प्राप्त हुआ था जिसमें पूर्व मंत्री के महिमानों द्वारा सरना स्थल की कुछ जमीन को कब्जा किये हुए हैं। उस समय भी पूर्व मंत्री के द्वारा सोमा उरांव को फोन एवं थाना के माध्यम से भी धमकाया गया था, जिसके कारण आज भी सरना स्थल का घेराबंदी नहीं हो पाया है। लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है आप रैली कर रहे हैं आप कीजिए मैं रोकूंगाँ नहीं लेकिन लोगों को सावधान/अवगत कर रहा हूँ। आपलोगों के जैसा विरोध नहीं कर रहा हूँ। आपलोगों के द्वारा 24 दिसम्बर 2023 उलगुलान आदिवासी डीलिस्टिंग महारैली को रोकने के विरोध में 14-15 आवेदन पडे़ थे। हमलोग किसी का आलोचना नहीं करते हैं, कौन क्या किया नहीं किया इस पर मैं नही पड़ना चाहता हूँ। पूर्व मंत्री बन्धु तिर्की से मेरा तीन सवाल है? इसको वे पूरा करे क्योंकि अभी वे सरकार में हैं – 1. वर्तमान समय में जो जाति प्रमाण पत्र निर्गत हो रहा है उस जाति प्रमाण पत्र में पिता के नाम के साथ पति का नाम होना अनिवार्य हो? इस बाबत के केबिनेट से एक पत्र निकलवाए?2. यदि सरना धर्म कोड पारित हो जाती है तो वर्तमान समय में जो जनजातियों को अनुच्छेद-342 के तहत् प्राप्त होने वाले आरक्षण/अधिकार बरकरार रहेगा या नहीं? इस बाबत भी एक पत्र निकलवाए? 3. बी.पी. मंडल आयोग-1990 के अनुसार इसाई को अन्य पिछड़ा वर्ग-2 (Other Backward Class-II) में रखा गया है और आज तक इसाई अनुसूचित जनजाति का आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। इस बात को सभी जनता तक पहुंचाने हेतु भी केबिनेट से एक पत्र निकलवाए?इसाईयों/अंग्रेजों का षड्यत्र- जब देष गुलाम था उस समय से लेकर आज तक इसाईयों व अंग्रेजों के द्वारा धर्मान्तरण के लिए जबरजस्त षडयंत्र चलता आ रहा है कि किस प्रकार हमलोग आदिवासियों का धर्मान्तरण कर सके और उसका मूल धर्म-संस्कृति, परम्परा, रूढ़ी प्रथा को नष्ट कर इसाई बनाएं और राज्य में इसाई गणराज्य स्थापित करें ‘‘पाकिस्तान देष से भी खतरनाक हैं ईसाई’’ क्योंकि इनका मुख्य खेल एक है कि हमलोग अधिक से अधिक जनजातियो का धर्मांन्तरण कराकर इसाई गणराज्य स्थापित करे। जैसे- देष आजादी से पहले और अबतक धर्मान्तरण का सिलसिला चला आ रहा है और देष आजाद होने से पहले धर्मान्तरण का प्रयास किया। देष आजादी के बाद सिलसिला जारी रखा और षडयंत्र करके नेम्हा बाईबल पुस्तक का निर्माण किया जिसके अन्तर्गत जनजातियों का गांवा देवती का खूंटा, जतरा का खूंटा, सरना स्थल का सखुवा पेड़ बगैरह सबों को तहस-नहस कर नष्ट कर दो, इसके बाद स्कूलों में नामांकन हेतु गोत्र को अनिवार्य करवाना, जबकि गोत्र का प्रयोग शादी-विवाह के समय होता है। तत्पष्चात् ‘‘प्रार्थना सभा’’ का गठन किया जिसमें मेरे आदमियों को लगाया। प्रार्थाना सभा के माध्यम से धर्म गुरू/धर्म बहन/धर्म भाई का निर्माण कराया। इसके अन्तर्गत पहान, महतो, कोटवार, पईनभोरा रैयत समाज के उच्चे स्थान दिए व्यक्तियों को दर किनार किया गया। अब बिना पाहन के धर्म गुरू के माध्यम से ही अचारण बनाना, भेलवा फाड़ना, बिना मुर्गी का बलि दिए। शादी-विवाह, रूढ़ी प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करना और प्रार्थना भजन करवाना। साथ ही साथ महिलाओं को मांग में सिन्दुर नहीं लगाना, कान नहीं छेदना, चूड़ी नहीं पहनना, शरीर में गोदना नहीं खुदवाना वगैरह-वगैरह इनका षड्यंत्र तथा इसकी योजना 100 साल से 1000 साल तक की पूर्व योजना बनाकर चलता है। चंगाई सभा कर धर्मातरण करना? इसका प्रभाव वर्तमान समय के दिख रहा है। अभी सरना स्थल में कहीं-कहीं मरियम का ग्रोटो एवं आखड़ा में क्रुष गाड़ना शुरू हो गया है। उसी के तहत् कार्डिनल के मांग पर सरना धर्म कोड (पूजा स्थल) की मांग की गई, आनन-फानन में विधानसभा से पारित कराकर बिना महामहिम राज्यपाल के साईन/हस्ताक्षर कराए सीधे-सीधे दिल्ली भेजना षड्यंत्र को न्योता देने जैसा है जबकि राज्यपाल का साईन होना आवष्यक था। चूंकि ईसाई यह बात जानती है कि हम सभी अल्पसंख्यक (Other Backward Class-II) में हैं और जनजाति का आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं जिस दिन जनजाति इस बात को जान जाऐंगे उस दिन हम सबों का खैर नहीं, इसलिए जिस प्रकार हमलोग अल्पसंख्यक हैं वैसा ही मूल जनजाति को भी अल्पसंख्यक बनाना है। यही कारण है कि इन्होंने नारा दिया कि ‘‘एक तीर एक कमान-सभी आदिवासी एक समान’’ जबकि यह सम्भव ही नहीं। बताते चलें कि अभी संविधान में वर्तमान में जनजातियों के लिए सबसे अधिक 28 अधिकार प्राप्त हैं। थोड़ी देर के लिए मान लिए कि सरना कोड मिल गया तो हम सभी अल्पसंख्यक हो जाएंगे और केवल संविधान के अनुसार अनुच्छेद-29-30 में ही अधिकार मिलेंगे जिसके अनुसार धर्म-प्रचार करना, स्कूल-कॉलेज खोलना मात्र है जबकि 26 अधिकार को छोड़कर केवल 2 अधिकार के लिए इतना मारा-मारी क्यों? पूरे भारत देष में 705 से ऊपर जनजाति हैं सभी एक मंच पर आए और सबकी सहमति से कोई एक निर्णय ले तभी कोई कोड मिल सकता है। नही ंतो नहीं क्योंकि अभी धर्म कोड के लिए 105 जनजाति लाईन में लगे हुए हैं। यदि सभी को कोड मिल जायेगा तो देष क्या बचेगा। इसलिए सरना कोड संभव नहीं है, केवल ईसाई का षड्यंत्र है। जबकि भारतीय संविधान के अनुसार अनुच्छेद-13 में जनजातियों के लिए रूढ़ी प्रथा ही जनजायितों की पहचान है तथा विधि का बल प्राप्त है। इसके उपर यदि कोई कानून बनता है या बनाता है तो वह शून्य माना जायेगा। यही कारण है कि कई ऐसे अनुच्छेद बना है जिसमें जनजातियों/आदिवासियों को हिन्दु माना गया है परन्तु जनजातियों का अपना कस्टमरी लॉ है जिसके कारण सदानों की तरह जनजातियों में ‘‘देहज प्रथा’’ नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 के अन्तर्गत कोई भी धर्म अन्तकरण से मान सकता है, जबर-जस्ती नहीं? देश आजाद होने के बाद आजतक केन्द्र सरकार के आरक्षण का लाभ व राज्य सरकार के आरक्षण का लाभ सीधे-सीधे इसाई/मुस्लमान उठा रहे हैं। यही कारण है कि इतना सबकुछ होते हुए भी आज मूल जनजाति मजदूरी एवं दाई काम करने के लिए मजबूर हैं और होगी भी क्यों नहीं? क्योंकि सारा आरक्षण का लाभ तो इसाई ही ले रहे हैं। इस बात को डॉ. कार्तिक उरांव ने 1970 के दषक में उठाए थे और आज उन्हीं के आधा-अधूरे कार्य को ‘‘जनजाति सुरक्षा मंच’’ प्रखर होकर पूरा निडरता के साथ पूरे जोर-षोर से पूरे देष में आवाज उठाएं हैं। इसी में बन्धु तिर्की जैसे लोगों का पीछे से चर्च एवं इनके अनुषांगिक संगठनों को पीड़ा दर्द हो रही है जबकि ये सभी इस बात को नहीं बोलते हैं कि जनजातियों का आरक्षण का लाभ इसाई और मुस्लिम को मिलना बंद हो। अतः सभी माँ-बाप, भाई-बहन, भाई-भतीजा, संगे-संबंधियों से पुनः आग्रह करते हैं कि अपना बेटा-बेटी का नौकरी चाहते हैं तो बन्धु तिर्की व अन्य के द्वारा बुलाया गया (4 फरवरी 2024) ‘‘आदिवासी एकता रैली’’’ ईसाई रैली है।

उसका बहिष्कार करें एवं जनजाति सुरक्षा मंच के साथ आए ताकि आनेवाले नये पीढ़ी (बेटा-बेटी) को नौकरी मिल सके, निर्णय आपके उपर है। जनजाति सुरक्षा मंच एक मात्र ऐसा संगठन है जो जनजातियों की मूल जड़ की समस्या को पकड़े हैं और प्रखर होकर बोल रही है। जनजाति सुरक्षा मंच के एक टीम पाहनों की है जो धर्मातरित ईसाई/मुस्लिम अपनी मूल धर्म, रूढ़ी प्रथा में वापस आना चाहते हैं तो पहानों द्वारा विधिवत सफेद मुर्गा की बलि देकर वापस आ सकते हैं। उन सबका हम सभी दिल से स्वागत करेंगे। हम सभी जोड़ने का काम करते हैं, तोड़ने का नहीं!इस प्रेसवार्ता में जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव, मेघा उरांव, हिन्दुवा उरांव, सन्नी उरांव, प्रदीप टोप्पो, सुषील मराण्डी, अंजली लकड़ा, पहलवान मुण्डा, लखन उरांव, विष्वकर्मा पाहन, जयमंत्री उरांव, जगरनाथ भगत, मनोज भगत, अजय सिंह भोक्ता, फागु मुण्डा, संतोष बड़ाईक, उमेष बड़ाईक, बिषु उरांव, लाला उराँव व अन्य उपस्थित थे।

Leave a Reply