प्रमंडलीय स्तरीय बाल श्रम उन्मूलन हेतु राज्य कार्ययोजना पर कार्यशाला का हुआ आयोजन

Spread the love

झारखंड सरकार द्वारा बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के मार्गदर्शन में, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और बाल कल्याण संघ के संयुक्त तत्वावधान में   समाहरणालय भवन में प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।


इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम उन्मूलन राज्य कार्ययोजना 2025-2030 को और अधिक व्यावहारिक व प्रभावी बनाना था। इसमें दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के विभिन्न विभागों के  अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, बाल अधिकार विशेषज्ञ, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि और अन्य हितधारकों सहित 90 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में बाल श्रम एवं बाल तस्करी जैसी गंभीर समस्याओं के कारण, रोकथाम, बचाव, पुनर्वास, कानूनी प्रावधान और निगरानी तंत्र को लेकर गहन चर्चा हुई। इस दौरान  कार्यक्रम में उप श्रमायुक्त श्री अभिनाश कृष्ण ने अपने संबोधन में कहा कि बाल श्रम के मामले में आंकड़ों की देखें तो पिछले सेंसस में पूरे देश में 66% बाल श्रमिक कम हुए थे उसके मुकाबले झारखंड में 78% बाल श्रमिक कम हुए है ।इससे हम झारखंड में कई राज्यों से बेहतर स्थिति में हैं। अब  होटल, और ढाबे में बाल श्रमिक नहीं मिलते मगर बच्चों आधुनिक और ग्लैमर जीवन जीने के लिए पार्ट टाइम जैसे पार्टी में खाना परोसना,टैक्टर में या टेंट हाउस के अलावा अन्य आयोजनों में दिखाई देते हैं ।ये सभी महंगे मोबाइल आधुनिक पहनावा और नशा पान के लिय मजदूरी करते हैं। अब हमें भी इसके लिय आधुनिक हो कर कार्य करने की आवश्यकता है साथ ही सरकार की जितनी भी योजनाएं चल रहें हैं उनका लाभ शतप्रतिशत इन तक पहुंचे ऐसा हम सब को प्रयास करना चाहिए।  साथ  ही प्रवासी मजदूरों के लिए भी सरकार कई योजनाओं का संचालन कर रही है जिसमें उनके एवं उनके परिवार के लिए भी लाभ का प्रावधान है।उन्हें पोर्टल पर पंजीयन कराने की आवश्यकता है।




डीएसपी  अमर कुमार पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि बाल श्रम हमारे समाज की सबसे बड़ी विडंबना है, हमारे भौगोलिक स्थिति को देखें तो बड़े शहरों में हमारे झारखंड के बच्चे बच्चियों को बाल श्रम हेतु महानगरों में अच्छे अनुपात में पाय जाते हैं।यह बहुत ही गंभीर चुनौती है क्योंकि यह बच्चों से उनका बचपन, अधिकार और सपने छीन लेता है। जब कोई बच्चा स्कूल की किताबों की जगह मजदूरी करता है, तो यह केवल उसका नहीं बल्कि पूरे समाज का नुकसान है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि बाल श्रम सिर्फ ग़ैरक़ानूनी काम नहीं है, बल्कि यह हमारी प्रगति में सबसे बड़ी रुकावट है। हर बच्चा मजदूर नहीं बल्कि भविष्य का डॉक्टर, शिक्षक, वैज्ञानिक और नेता हो सकता है। इसलिए ज़रूरी है कि हम मिलकर ठान लें—बच्चों के हाथ में सिर्फ किताब और कलम होगी, काम का बोझ नहीं। परिवारों को मज़बूत बनाने के लिए वैकल्पिक रोज़गार और सहायता दी जाए और समाज को यह संदेश देना होगा कि बाल श्रम से कोई भी परिवार समृद्ध नहीं होता, असली समृद्धि केवल शिक्षा से आती है। बाल श्रम को समाप्त करना सिर्फ पुलिस या प्रशासन का काम नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की साझा ज़िम्मेदारी है। इसमें सूचना का आदान प्रदान बहुत आवश्यक है  पुलिस हरेक जगह नहीं पहुंच सकती मगर सूचना पहुंच सकती है इसके लिय आप सभी को इस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।

बाल कल्याण संघ के सचिव एवं एट्सेक इंडिया के राष्ट्रीय समन्वयक श्री संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों के सामने कई चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास समाधान मौजूद हैं, जरूरत है सही जानकारी और दृष्टिकोण की, जिससे बचाए गए बच्चों को सम्मानपूर्वक समाज में पुनर्वासित किया जा सके।साथ ही यह देश का पहला ऐसा राज्य है  जहां बाल श्रम उन्मूलन हेतु 5 वर्षीय कार्य योजना तैयार किया जा रहा है जिससे सरकार की गंभीरता झलकती है।सरकार और श्रम विभाग बहुत ही संवेदनशील हो कर बाल हित में कार्य कर रही है हम सभी इसमें अपनी भागीदारी शतप्रतिशत दें।

सिमडेगा के डीएसपी रणवीर सिंह ने कहा कि बच्चों को काम से दूर रखकर पढ़ाई की तरफ ले जाना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने समझाया कि यह काम सिर्फ कानून से नहीं होगा, बल्कि इसमें समुदाय की भागीदारी बहुत ज़रूरी है। अक्सर हमें ऐसी सोच से जूझना पड़ता है, जहाँ लोग मानते हैं कि बच्चों को काम पर लगा देना, उन्हें बेकार बैठाने से बेहतर है। लेकिन हमें उन्हें यह विश्वास दिलाना होगा कि शिक्षा ही बच्चों का असली भविष्य है। इसके लिए हमें आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ उन्हें सही रास्ता दिखाना होगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाना बहुत ज़रूरी है, ताकि गरीबी का चक्र टूट सके। अगर खेती या प्राथमिक क्षेत्र से पर्याप्त आमदनी नहीं हो रही है, तो परिवारों को दूसरे काम की तरफ बढ़ने में मदद करनी चाहिए।
गुमला के श्रम अधीक्षक ने कहा कि बाल श्रम सिर्फ़ कानूनी मसला नहीं है, बल्कि यह गरीबी और संसाधनों की कमी से जुड़ी गहरी सामाजिक समस्या भी है। उन्होंने सवाल उठाया –अगर किसी परिवार में माता-पिता बीमार हैं या उनकी कमाई बहुत कम है, तो ऐसे में बच्चे को बचाने के बाद उस परिवार का क्या होगा  ऐसी समस्याएं कई बार विचलित कर देती है। कार्यक्रम के दौरान सभी जिलों से आय हितधारकों को FGD के माध्यम से चर्चा  कराया गया चर्चा में ज़ोर दिया गया कि बच्चों को बचाने के बाद उनका पुनर्वास होना चाहिए। इसके साथ-साथ बच्चों को पढ़ाई के साथ कौशल विकास देना और उनके माता-पिता को भी सहारा देना ज़रूरी है, ताकि पूरा परिवार एक नई शुरुआत कर सके। साथ ही सभी विभागों का आपसी सहयोग अति आवश्यक है।
यह कार्य योजना यहीं तक सीमित न रहें, बल्कि उनमें जमीनी हकीकत और व्यावहारिक समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह भी सुझाव दिया गया कि बच्चों को बचाने के बाद केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता को भी रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि परिवार की आजीविका सुरक्षित हो सके और बच्चे दोबारा श्रम या तस्करी की स्थिति में न लौटें।
ग्राम स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक निगरानी और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि बचाव अभियान से लेकर पुनर्वास और निगरानी तक की पूरी प्रक्रिया में समय पर सूचना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है, क्योंकि देरी कई बार बच्चों के हितों को नुकसान पहुंचाती है।

Leave a Reply