
रांची/गांडेय: गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन मारांग बुरु धोरोमगाड़ महासम्मेलन में शामिल हुईं। इस महासम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आदिवासी समाज के चिंतक, विचारक और प्रतिनिधि जुटे। कार्यक्रम के दौरान कल्पना सोरेन ने मारांग बुरु के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे।

कल्पना सोरेन ने कहा कि मारांग बुरु केवल एक पहाड़ नहीं हैं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा, पहचान और अस्तित्व का आधार हैं। यह आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि आज आदिवासी समाज से सवाल किया जा रहा है कि मारांग बुरु से उनका संबंध कितना पुराना है? इसका उल्लेख कहां है और किस अभिलेख में दर्ज है? लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी समाज की सदियों पुरानी आस्था और परंपरा का प्रमाण केवल कागजों में दर्ज कुछ पंक्तियों से ही तय किया जा सकता है?

कल्पना सोरेन ने आदिवासी समाज की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मारांग बुरु हमारी आस्था भी हैं और हमारी पहचान भी। हमारी परंपराएं केवल लिखित दस्तावेजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही सांस्कृतिक विरासत में जीवित हैं।

महासम्मेलन के माध्यम से आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक अस्मिता और पारंपरिक विरासत को मजबूती से सामने रखने का संदेश दिया गया।

