रांची के अस्पतालों और नर्सिंग होम को 7 दिनों का अल्टीमेटम, मरीजों को मिलेगी फीस और डॉक्टरों की योग्यता की जानकारी

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रांची: राजधानी रांची के अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। अब सभी संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को मरीजों के लिए जरूरी जानकारियां सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रांची के कार्यालय ने इस संबंध में 29 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी करते हुए सात दिनों के भीतर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।

इस आदेश के बाद अस्पतालों को अपने यहां इलाज की दरों, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और वैध निबंधन प्रमाणपत्र से जुड़ी जानकारियां प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करनी होंगी।

अस्पतालों में लगाना होगा रेट चार्ट

आदेश के अनुसार, सभी संबंधित अस्पतालों और क्लीनिकों को अपनी चिकित्सा सेवाओं की अद्यतन और मदवार दर सूची प्रदर्शित करनी होगी। इसमें डॉक्टरों की परामर्श फीस, विभिन्न जांचों के शुल्क, चिकित्सा प्रक्रियाओं का खर्च, बेड चार्ज और अन्य लागू सेवा शुल्क की जानकारी शामिल होगी।

रेट चार्ट ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जहां मरीज और उनके परिजन आसानी से उसे देख सकें। इससे मरीजों को इलाज पर होने वाले संभावित खर्च का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही, अस्पतालों में लिए जाने वाले शुल्क को लेकर पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

हालांकि, आदेश में किसी विशेष सेवा की फीस तय नहीं की गई है। अस्पतालों को अपनी लागू दरों का स्पष्ट प्रदर्शन करने का निर्देश दिया गया है।

डॉक्टरों की योग्यता और विशेषज्ञता भी करनी होगी सार्वजनिक

सिविल सर्जन कार्यालय के निर्देश के मुताबिक, अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध डॉक्टरों से संबंधित जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी।

इसमें डॉक्टर का नाम, शैक्षणिक योग्यता, संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का विवरण, विशेषज्ञता और परामर्श या ड्यूटी का समय शामिल होगा।

इससे मरीजों को यह जानने में सहूलियत होगी कि अस्पताल में कौन-से डॉक्टर उपलब्ध हैं, उनकी विशेषज्ञता क्या है और उनसे किस समय परामर्श लिया जा सकता है।

वैध निबंधन प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य

आदेश में सभी संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी वैध और अद्यतन निबंधन प्रमाणपत्र या लाइसेंस प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है।

प्रमाणपत्र को रिसेप्शन या किसी अन्य प्रमुख स्थान पर लगाया जाना होगा, ताकि मरीज और आम लोग संबंधित संस्थान की निबंधन स्थिति की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें।

इसके अलावा, अस्पतालों को उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं, मरीजों के अधिकारों, शिकायत निवारण व्यवस्था और लागू नियमों के तहत जरूरी अन्य जानकारियां भी प्रदर्शित करनी होंगी।

ज्योति शर्मा के अनुरोध के बाद जारी हुआ आदेश

सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से जारी कार्यालय आदेश संख्या 5236 के अनुसार, सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा के आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से मिले अनुरोध के संदर्भ में यह निर्देश जारी किया गया है।

अनुरोध में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (Clinical Establishments Act-CEA) के प्रावधानों के अनुपालन का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद रांची जिले में संचालित संबंधित चिकित्सा प्रतिष्ठानों को जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया।

सात दिनों के भीतर करना होगा अनुपालन

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों को आदेश जारी होने की तारीख से सात दिनों के भीतर निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा। इसके बाद भी इन व्यवस्थाओं को लगातार बनाए रखना अनिवार्य होगा।

निरीक्षण प्राधिकारियों और नामित अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान निर्देशों के अनुपालन की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। यदि किसी संस्थान में कमी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसकी जानकारी सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को दी जाएगी, ताकि लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई की जा सके।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन से मरीजों को इलाज की लागत, डॉक्टरों की योग्यता और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही, शिकायत निवारण व्यवस्था सार्वजनिक होने से मरीजों और उनके परिजनों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उचित माध्यम तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि रांची के अस्पताल और नर्सिंग होम निर्धारित सात दिनों के भीतर इन निर्देशों का कितना अनुपालन करते हैं। निरीक्षण के दौरान होने वाली जांच इस आदेश को प्रभावी ढंग से लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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