प्रदूषण और विस्थापन झारखंड के लोग झेले और फैसले केंद्र दे, यह स्वीकार्य नहीं : उज्जवल तिवारी

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रांची। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा संसद से पारित खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 (MMDR) को लेकर झारखंड कांग्रेस ने तीखा विरोध जताया है।


कांग्रेस प्रवक्ता उज्जवल प्रकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि खनिजों पर सेस लगाने के राज्यों के अधिकार को समाप्त करने का निर्णय केंद्र सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि झारखंड के लोग खनन से होने वाले प्रदूषण और विस्थापन की पीड़ा झेलें और खनिज संसाधनों से जुड़े फैसले केंद्र सरकार करे, यह स्वीकार्य नहीं है।


1.32 लाख करोड़ के बकाये का मुद्दा उठाया
उज्जवल तिवारी ने कहा कि केंद्रीय कोल कंपनियों पर झारखंड का पहले से करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये बकाया बताया जाता है, जो बढ़कर लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित प्रदेश कांग्रेस के नेता लगातार केंद्र से इस राशि के भुगतान की मांग करते रहे हैं।


कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि अब MMDR संशोधन विधेयक के जरिए झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्य के राजस्व पर भी असर डालने का प्रयास किया गया है। उनके मुताबिक इससे राज्य को मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये के राजस्व पर प्रभाव पड़ सकता है और विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधन प्रभावित हो सकते हैं।


प्रखंड स्तर तक चलेगा जन-जागरूकता अभियान
उज्जवल तिवारी ने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी कर रही है। पार्टी विधेयक से होने वाले संभावित नफा-नुकसान को प्रखंड स्तर तक ले जाएगी और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चलाएगी।


कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि खनिज संसाधनों, राज्य के राजस्व और झारखंड के हितों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी आगे भी अपना विरोध जारी रखेगी।

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