झारखंड में कर चोरी पर लगेगी लगाम, 6 महीने में तैयार होगा IRIS सिस्टम; कई विभागों का डेटा होगा एकीकृत

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रांची: झारखंड में राजस्व संग्रह बढ़ाने और कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। वाणिज्य-कर विभाग की CT-MIS परियोजना के तहत नए सिस्टम इंटीग्रेटर के रूप में चयनित Choice Consultancy Services Private Limited के साथ गुरुवार को एकरारनामा संपन्न हुआ। प्रोजेक्ट भवन में आयोजित कार्यक्रम में वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में यह समझौता किया गया।

इस परियोजना के तहत राज्य में Integrated Revenue Intelligence System यानी IRIS विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों के ऑनलाइन पोर्टल और डेटाबेस को आपस में जोड़ा जाएगा, ताकि राजस्व से संबंधित जानकारियों का बेहतर विश्लेषण किया जा सके और संभावित कर चोरी तथा राजस्व के नुकसान की पहचान की जा सके।

केंद्र की नीतियों से झारखंड को 22 हजार करोड़ के नुकसान का दावा

वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र की आर्थिक नीतियों के कारण झारखंड को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है। उन्होंने बताया कि MMDR एक्ट के कारण राज्य को करीब 14 हजार करोड़ रुपये, जबकि जीएसटी सुधार और मनरेगा के अंतर्गत अनुदान में कमी के कारण लगभग चार-चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है।

मंत्री ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन खनन के कारण पर्यावरण, वन क्षेत्र, जनस्वास्थ्य और सड़कों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई भी राज्य को अपने संसाधनों से करनी पड़ती है। ऐसे में राज्य की वित्तीय आत्मनिर्भरता मजबूत करने के लिए अपने राजस्व संग्रहण की क्षमता बढ़ाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार राजस्व सृजन की संभावनाओं को विकसित करने और राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।

छह महीने में विकसित होगी IRIS प्रणाली

वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव अमित कुमार के अनुसार, IRIS प्रणाली को छह महीने के भीतर विकसित किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन वर्षों तक इसके क्रियान्वयन का कार्य किया जाएगा।

इस सिस्टम में Business Intelligence (BI) और Artificial Intelligence (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे विभिन्न विभागों के आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित कर अपवंचन और राजस्व ह्रास की पहचान करने में मदद मिलेगी।

प्रणाली से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर संबंधित विभाग नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे। इससे राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

कई विभागों के पोर्टल होंगे एकीकृत

IRIS परियोजना के तहत विभिन्न सरकारी विभागों के ऑनलाइन पोर्टल को API Integration के माध्यम से जोड़ने की योजना है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

– GSTN और JIMMS: जीएसटी नेटवर्क तथा खान एवं भूतत्व विभाग के पोर्टल के बीच एकीकरण।
– VAHAN: परिवहन विभाग के पोर्टल का उपयोग।
– WAMIS: कार्य विभागों और आईटी विभाग से संबंधित पोर्टल।
– भूमि पंजीकरण पोर्टल: राजस्व विभाग से संबंधित जानकारी।
– Property Tax: नगर विकास विभाग के संपत्ति कर संबंधी आंकड़े।
– Labour Cess: श्रम विभाग के उपकर संबंधी रिकॉर्ड।
– VAT पोर्टल: परिवहन विभाग और उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पोर्टल के साथ एकीकरण।
– JPT पोर्टल: नगर विकास विभाग के ट्रेड लाइसेंस पोर्टल से एकीकरण।
– JED पोर्टल: ऊर्जा विभाग के बिजली बिल संबंधी पोर्टल के साथ एकीकरण।

इन पोर्टलों से प्राप्त आंकड़ों का समेकित विश्लेषण कर विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने और राजस्व से जुड़ी अनियमितताओं की पहचान करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

राजस्व प्रशासन को तकनीक से मिलेगी मजबूती

कार्यक्रम के दौरान Choice Consultancy Services Private Limited के प्रतिनिधि सुभाष पाठक ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तावित प्रणाली की तकनीकी संरचना और कार्यप्रणाली की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि अलग-अलग विभागों के डेटाबेस को एकीकृत करने से राजस्व संबंधी सूचनाओं का विश्लेषण अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। इससे संभावित कर चोरी और राजस्व ह्रास की पहचान करने तथा संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम में संयुक्त सचिव पूनम कुजूर, राज्य-कर अपर आयुक्त दिलीप कुमार मंडल, जीवनारायण मंडल सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कंसल्टेंसी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

निष्कर्ष: झारखंड सरकार की इस पहल का उद्देश्य विभिन्न विभागों के राजस्व संबंधी आंकड़ों को एकीकृत कर कर चोरी पर नियंत्रण, राजस्व संग्रहण में वृद्धि और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करना है। हालांकि, इस प्रणाली की वास्तविक प्रभावशीलता इसके क्रियान्वयन और विभागों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

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