
बाबा विद्यापति स्मारक समिति की ओर से आगामी 25 अक्टूबर 2026, रविवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर कोजागरा (महालक्ष्मी पूजा) पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसको लेकर 20 अक्टूबर को समिति के कार्यालय में अध्यक्ष जयन्त झा की अध्यक्षता में एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से कोजागरा पर्व मनाने का निर्णय लिया गया।
समिति के अनुसार, कोजागरा मिथिलांचल की एक महत्वपूर्ण पारंपरिक और सांस्कृतिक परंपरा है। शरद पूर्णिमा के दिन मिथिला समाज में यह पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर नवविवाहित जोड़े के परिवारों के बीच पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष महत्व होता है।
परंपरा के अनुसार, नवविवाहित लड़की पक्ष की ओर से लड़के पक्ष को नए वस्त्र, पान, मखाना, चूड़ा, दही, चीनी, खाजा और लड्डू सहित विभिन्न खाद्य सामग्री भेंट की जाती है। इन सामग्रियों को माता लक्ष्मी के समक्ष भोग लगाने के बाद समाज के लोगों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात अमृत वर्षा होती है। इस अवसर पर घरों में खीर बनाकर रातभर खुले स्थान पर ओस में रखा जाता है और अगले दिन परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
बैठक में अध्यक्ष जयन्त झा के अलावा डॉ. पंकज रॉय, पूर्णेंदु ठाकुर, ज्ञानदेव झा, विश्व मोहन झा, उदित नारायण ठाकुर, आशु झा, वैद्य मनोज झा, राजेश झा, संतोष मिश्रा, विनय सिंह, रणजीत लाल दास, मृत्युंजय झा, राधेश्याम यादव, हेमंत झा और अनूप झा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
समिति के अध्यक्ष जयन्त झा ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि 25 अक्टूबर को समिति के कार्यालय में कोजागरा पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन के माध्यम से मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मान्यताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।