
रांची, 27 अगस्त 2026: झारखंड में खनिज संसाधनों पर राज्य सरकार द्वारा सेस लगाए जाने के अधिकार को लेकर सियासत तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल किया है कि आखिर भाजपा को झारखंड के खनिज पर सेस लगाए जाने से आपत्ति क्यों है।
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने 8:1 के ऐतिहासिक फैसले में राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने की शक्ति को मान्यता दी है। ऐसे में भाजपा द्वारा इस अधिकार पर सवाल उठाना राज्यों के संवैधानिक अधिकार और संघीय व्यवस्था को कमजोर करने जैसा है।
झामुमो ने भाजपा से पूछे तीन सवाल
झामुमो महासचिव ने भाजपा नेताओं से तीन सीधे सवाल किए। उन्होंने पूछा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों के अधिकार को संवैधानिक मान्यता दी है, तो भाजपा को झारखंड द्वारा अपने खनिज पर सेस तय करने से आपत्ति क्यों है?
उन्होंने दूसरा सवाल किया कि खनिज झारखंड की धरती से निकलता है और खनन के कारण होने वाले पर्यावरणीय व सामाजिक दुष्प्रभावों को झारखंड के लोग झेलते हैं, तो उससे जुड़े सेस और राजस्व का फैसला झारखंड क्यों नहीं कर सकता?
तीसरे सवाल में पांडेय ने कहा कि यदि झारखंड का खनिज महंगा लगता है तो कोई उसे खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। उनके मुताबिक, दूसरे राज्यों से सस्ता खनिज उपलब्ध होने पर खरीदार वहां से खरीद सकते हैं, लेकिन झारखंड को अपने प्राकृतिक संसाधन औने-पौने दाम पर देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
‘खनिज झारखंड का, फैसला भी झारखंड का’
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि वर्षों से झारखंड की धरती से कोयला, लौह अयस्क समेत कई महत्वपूर्ण खनिज निकाले जाते रहे हैं। उनका आरोप है कि प्राकृतिक संसाधनों का बड़ा आर्थिक लाभ राज्य से बाहर जाता रहा, जबकि विस्थापन, प्रदूषण, जंगल और जमीन से जुड़ी कीमत झारखंड के लोगों ने चुकाई है।

उन्होंने कहा कि अब वह व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी जिसमें खनिज झारखंड से निकाला जाए, उसकी कीमत दूसरे तय करें और जब झारखंड अपने संसाधनों पर सेस लगाए तो उसका विरोध किया जाए।
झामुमो महासचिव ने कहा कि झारखंड किसी की खनिज संपदा की दुकान नहीं है। राज्य को अपने प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय का इस्तेमाल अपने लोगों, खासकर आदिवासी, मूलवासी, खनन प्रभावित परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के हित में करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे जितना दबाव बनाए, झारखंड अपने संवैधानिक और प्राकृतिक अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।
विनोद कुमार पांडेय ने कहा—
“खनिज झारखंड का है। उस पर अधिकार झारखंड का है। उससे होने वाली कमाई में पहला हक झारखंडियों का है और अपने संसाधनों पर फैसला भी झारखंड ही करेगा।”
